अमरनाथ मंदिर

Short information

  • Location: Baltal Amarnath Trek, Forest Block, Anantnag, Pahalgam, Jammu and Kashmir 192230
  • Yatra Start Date : 29th June 2017
  • Nearest Railway Station : Jammu Tawi, The temple is located at a distance of about 178 km from the railway station.
  • Nearest Air Port : Jammu Airport, which is around 178 km away from the temple.
  • Yatra Start Places : Pehelgaam and Sonmarg Baltaal
  • Distance from Jammu : Pahalgaam is 315 kilometers from Jammu and Baltaal is aprox 400 kilometers from Jammu.
  • Yatra Months : July–August.
  • Walking distance: Pahalgam is 32 kilometers from Amarnath Temple and Baltaal is 14 kilometers from Amarnath Temple.

अमरनाथ मंदिर भारत के जम्मू-कश्मीर राज्य में स्थित है। यह मंदिर हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण अंग है, और हिंदू धर्म में सबसे पवित्र मंदिरों में से एक माना जाता है। यह मंदिर एक गुफा के रूप स्थित है। इस गुफा की लंबाई (भीतर की ओर गहराई) 19 मीटर और चैड़ाई 16 मीटर है। गुफा 11 मीटर ऊँची है। इस गुफा का अमरनाथ गुफा भी कहा जाता है। अमरनाथ मंदिर भगवान शिव को पूर्णरूप से समर्पित है। इस मंदिर तक पहुचने की यात्रा को अमरनाथ की यात्रा कहा जाता है जो पूरे साल मे लगभग 45 दिन (जुलाई व अगस्त) ही होती है। इस स्थान का नाम अमरनाथ व अमरेश्वारा इसलिए पड़ा क्योंकि भगवान शिव ने माता पार्वती को अमरत्व का रहस्य बताया था।

पवित्र गुफा की विशेषता
इस स्थान की प्रमुख विशेषता पवित्र गुफा में बर्फ से प्राकृतिक शिवलिंग का निर्मित होना है। प्राकृतिक बर्फ से निर्मित होने के कारण इसे स्वयंभू बर्फ का शिवलिंग भी कहते हैं यह शिवलिंग लगभग 10 फुट ऊचा बनता है। आषाढ़ पूर्णिमा से शुरू होकर रक्षाबंधन तक पूरे सावन महीने में होने वाले पवित्र हिमलिंग दर्शन के लिए लाखो लोग यहां आते है। चन्द्रमा के घटने-बढ़ने के साथ-साथ इस बर्फ का आकार भी घटता-बढ़ता रहता है। श्रावण पूर्णिमा को यह अपने पूरे आकार में आ जाता है और अमावस्या तक धीरे-धीरे छोटा होता जाता है। मूल अमरनाथ शिवलिंग से कई फुट दूर गणेश, भैरव और पार्वती के वैसे ही अलग अलग हिमखंड हैं।

ऐतिहासिक महत्व
इस गुफा का अपना ऐतिहासिक महत्व भी है, वो इसलिए क्योकि इसी गुफा में माता पार्वती को भगवान शिव ने अमरकथा सुनाई थी, जिसे सुनकर सद्योजात शुक-शिशु शुकदेव ऋषि के रूप में अमर हो गये थे। गुफा में आज भी श्रद्धालुओं को कबूतरों का एक जोड़ा दिखाई दे जाता है, जिन्हें श्रद्धालु अमर पक्षी बताते हैं। वे भी अमरकथा सुनकर अमर हुए थे।

ऐसा माना जाता है कि भगवान शंकर जब पार्वती को अमर कथा सुनाने ले जा रहे थे, तो उन्होंने छोटे-छोटे अनंत नागों को अनंतनाग में छोड़ा, माथे के चंदन को चंदनबाड़ी में उतारा, अन्य पिस्सुओं को पिस्सू टॉप पर और गले के शेषनाग को शेषनाग नामक स्थल पर छोड़ा था। ये तमाम स्थल अब भी अमरनाथ यात्रा में आते हैं।

अमरनाथ गुफा का सबसे पहले पता सोलहवीं शताब्दी के पूर्वाध में एक मुसलमान गडरिए को चला था। आज भी चैथाई चढ़ावा उस मुसलमान गडरिए के वंशजों को मिलता है।

अमरनाथ यात्रा
अमर नाथ यात्रा पर जाने के भी दो रास्ते हैं। एक पहलगाम होकर और दूसरा सोनमर्ग बलटाल से इन दोनों मार्गो से आगे की यात्रा पैदल होती है। पहलगाम से जानेवाले रास्ते को सरल और सुविधाजनक समझा जाता है। बलटाल से अमरनाथ गुफा की दूरी केवल 14 किलोमीटर है और यह बहुत ही दुर्गम रास्ता है और सुरक्षा की दृष्टि से भी संदिग्ध है। इस मार्ग से जाने वाले लोग अपने जोखिम पर यात्रा करते है। रास्ते में किसी अनहोनी के लिए भारत सरकार जिम्मेदारी नहीं लेती है।

पहलगाम जम्मू से 315 किलोमीटर की दूरी पर है तथा यहीं से तीर्थयात्रियों की पैदल यात्रा यहीं से आरंभ होती है। पहलगाम के बाद पहला पड़ाव चंदनबाड़ी है, जो पहलगाम से 8 किलोमीटर की दूरी पर है। पहली रात तीर्थयात्री यहीं बिताते हैं। इसके ठीक दूसरे दिन पिस्सु घाटी की चढ़ाई शुरू होती है। लिद्दर नदी के किनारे-किनारे पहले चरण की यह यात्रा ज्यादा कठिन नहीं है।

चंदनबाड़ी से 14 किलोमीटर दूर शेषनाग में अगला पड़ाव है। यह मार्ग खड़ी चढ़ाई वाला और खतरनाक है। यहीं पर पिस्सू घाटी के दर्शन होते हैं। अमरनाथ यात्रा में पिस्सू घाटी काफी जोखिम भरा स्थल है। यहाँ पर्वतमालाओं के बीच नीले पानी की खूबसूरत झील है। तीर्थयात्री यहाँ रात्रि विश्राम करते हैं और यहीं से तीसरे दिन की यात्रा शुरू करते हैं।

शेषनाग से पंचतरणी 8 मील के फासले पर है। मार्ग में बैववैल टॉप और महागुणास दर्रे को पार करना पड़ता हैं। महागुणास चोटी से पंचतरणी तक का सारा रास्ता उतराई का है। यहाँ पांच छोटी-छोटी सरिताएँ बहने के कारण ही इस स्थल का नाम पंचतरणी पड़ा है। यह स्थान चारों तरफ से पहाड़ों की ऊंची-ऊंची चोटियों से ढका है। ऑक्सीजन की कमी की वजह से तीर्थयात्रियों को यहाँ सुरक्षा के इंतजाम करने पड़ते हैं।

अमरनाथ की गुफा यहाँ से केवल 8 किलोमीटर दूर रह जाती हैं और रास्ते में बर्फ ही बर्फ जमी रहती है। यह रास्ता काफी कठिन है, लेकिन अमरनाथ की पवित्र गुफा में पहुँचते ही सफर की सारी थकान पल भर में छू-मंतर हो जाती है और अद्भुत आत्मिक आनंद की अनुभूति होती है।

यात्रा के लिए तैयारी
इस यात्रा क दौरान अपने साथ पर्याप्त गर्म कपड़े, जरूरी दवाईयां और हल्का स्नैक्स रखें। टाॅर्च, माचिस, पावर बैंक, पाॅलीथिन बैग आदि रखें और यात्रा के लिए मिले निर्देशों का पालन जरूर करें।

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