उत्तरकाशी जिले के गोविंद नेशनल पार्क के बीच बसे हर की दून घाटी का नाम लेते ही मन में बर्फ से ढकी चोटियाँ, चीड़-दियों के जंगल और शांत बहती नदियों की एक अद्भुत तस्वीर उभर आती है। इसे “Valley of Gods” यानी देवताओं की घाटी भी कहा जाता है, क्योंकि मान्यता है कि यही वह रास्ता है जहाँ से पांडव स्वर्ग की ओर गए थे।
हर की दून ट्रेक सिर्फ एक साहसिक यात्रा नहीं, बल्कि आत्मा को शांत करने वाली ऐसी अनुभूति है जो जीवन भर याद रह जाती है।
हर की दून ट्रेक 3,566 मीटर की ऊँचाई पर एक ऐसी हरी-भरी घाटी है जो पूरे साल अलग-अलग रंगों में खिलती है—
यहाँ से स्वर्गारोहिणी, कालानाग (Black Peak), बंदरपूँछ और अन्य हिमालयी चोटियों के अप्रतिम दर्शन होते हैं।
लोककथाओं के अनुसार—
इन गाँवों में लोग आज भी लकड़ी से बने पारंपरिक घरों में रहते हैं और सदियों पुरानी विरासत को संभाले हुए हैं।
ट्रेक के दौरान देवदार, भोजपत्र और ओक के घने जंगल मिलते हैं। पक्षियों की चहचहाहट और नदी की धारा पूरे रास्ते आपका साथ देती है।
यह ट्रेक लगभग पूरे समय सुपिन नदी के किनारे-किनारे चलता है, जिससे यात्रा और भी मनमोहक हो जाती है।
हर की दून प्राकृतिक छटा का बेजोड़ संगम है—मैदानी ढलान, झरने, ग्लेशियर और दूर तक फैली बर्फ।
सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक हर पल ऐसा लगता है मानो प्रकृति आपके सामने नया कैनवास खोल रही हो।
हर की दून ट्रेक को मॉडरेट (मध्यम) श्रेणी में माना जाता है।
यह लगभग 7–8 दिन का ट्रेक है जिसमें प्रतिदिन 5–6 घंटे चलना पड़ता है।
हर मौसम इस जगह को अलग रंग देता है।
⭐ Day 1 – देहरादून → सांकरी (200 किमी)
⭐ Day 2 – सांकरी → तालुका → ऑसला (13 किमी)
⭐ Day 3 – ऑसला → हर की दून (11 किमी)
⭐ Day 4 – हर की दून अन्वेषण दिवस
⭐ Day 5 – हर की दून → ऑसला
⭐ Day 6 – ऑसला → तालुका → सांकरी
⭐ Day 7 – सांकरी → देहरादून
हर की दून ट्रेक सिर्फ एक साहसिक यात्रा नहीं, बल्कि प्रकृति के करीब आने का एक मौका है। यहाँ की शांत हवा, हिमालय की ऊँची चोटियाँ, घने जंगल और नदी की मधुर ध्वनि—सब मिलकर मन को ऐसा सुकून देती हैं जैसे कोई छोटी सी झील दिल के अंदर बन गई हो।
अगर आप जीवन में एक बार कोई ऐसा ट्रेक करना चाहते हैं जो आपको भीतर तक छू जाए, तो हर की दून आपकी अगली मंज़िल होनी ही चाहिए।