वाराणसी/नई दिल्ली: आज शाम जब आसमान में चंद्र ग्रहण का दृश्य होगा, उस समय वायुमंडल में ऊर्जा का स्तर बहुत संवेदनशील होता है। जहाँ एक ओर ग्रहण के दौरान बाहरी पूजा और मूर्ति स्पर्श वर्जित है, वहीं 'मानसिक जाप' के लिए यह समय स्वर्ण अवसर के समान है। यदि आप भी मानसिक शांति, स्वास्थ्य और बाधाओं से मुक्ति चाहते हैं, तो ग्रहण काल (दोपहर 03:20 से शाम 06:45 तक) के दौरान इन मंत्रों का आश्रय लें।
चंद्रमा का सीधा संबंध हमारे मन और स्वास्थ्य से है। ग्रहण के दौरान चंद्रमा पीड़ित होता है, ऐसे में भगवान शिव के इस मंत्र का जाप अत्यंत लाभकारी है।
मंत्र: ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
लाभ: यह मंत्र अकाल मृत्यु के भय को दूर करता है और गंभीर रोगों से रक्षा करता है।
जिन लोगों की कुंडली में चंद्रमा कमजोर है या जिन्हें बहुत अधिक तनाव रहता है, उन्हें आज चंद्र देव के बीज मंत्र का जाप करना चाहिए।
मंत्र: ॐ श्रां श्रीं श्रौं स: चन्द्रमसे नम:।।
लाभ: मन एकाग्र होता है और भावनाओं पर नियंत्रण बढ़ता है।
गायत्री मंत्र को वेदों का सार माना गया है। ग्रहण की नकारात्मक तरंगों से बचने के लिए यह सबसे सुरक्षित कवच है।
मंत्र: ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्॥
लाभ: बुद्धि प्रखर होती है और घर के भीतर की नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है।
चूँकि आज होली का पर्व भी है, इसलिए भगवान विष्णु और कृष्ण के मंत्रों का जाप आपको मोक्ष और आनंद की ओर ले जाता है।
मंत्र: ॐ नमो भगवते वासुदेवाय या हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे॥
मानसिक जाप: ग्रहण के दौरान बोलकर नहीं, बल्कि मन ही मन मंत्रों का उच्चारण करें।
आसन: ऊन या कुश के आसन पर बैठकर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।
दीपक न जलाएं: ग्रहण के दौरान दीपक जलाना या पूजा घर का पर्दा खोलना वर्जित है। केवल ध्यान करें।
शुद्धिकरण: ग्रहण समाप्त होने (रात 08:55 के बाद) पर स्नान करें और फिर दान-पुण्य करें।