जब बाल कृष्ण के दर्शन के लिए योगी बनकर गोकुल पहुँचे महादेव; पढ़िए यशोदा मैया और शिव के संवाद की यह अद्भुत कथा

जब बाल कृष्ण के दर्शन के लिए योगी बनकर गोकुल पहुँचे महादेव; पढ़िए यशोदा मैया और शिव के संवाद की यह अद्भुत कथा

गोकुल, उत्तर प्रदेश: पौराणिक कथाओं में भगवान शिव और भगवान विष्णु के प्रेम के कई प्रसंग मिलते हैं, लेकिन 'नंदलाल' के बाल रूप को देखने की महादेव की व्याकुलता का वर्णन सबसे निराला है। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की द्वादशी का वह दिन आज भी भक्तों के बीच चर्चा का विषय रहता है, जब स्वयं 'कालों के काल' महाकाल एक भिक्षुक योगी बनकर नंद भवन की देहरी पर खड़े हो गए थे।

"भिक्षा नहीं, लाल के दर्शन चाहिए"

कथा के अनुसार, जब भगवान शिव को ज्ञात हुआ कि वैकुंठनाथ ने कृष्ण अवतार लिया है, तो वे स्वयं को रोक नहीं सके। वे बाघंबर ओढ़े, गले में सर्प लपेटे और हाथ में डमरू लिए गोकुल की गलियों में 'अलख निरंजन' पुकारने लगे। जब यशोदा मैया ने एक दासी के हाथ भिक्षा भेजी, तो शिव ने उसे अस्वीकार कर दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा— "मैया! मुझे अन्न-धन की लालसा नहीं, मुझे तो बस तुम्हारे पालने में झूलते उस नटखट बाल कृष्ण का मुख देखना है।"

यशोदा का डर और महादेव का तर्क

माता यशोदा अपने लल्ला को लेकर डरी हुई थीं। उन्होंने झरोखे से झाँककर कहा, "बाबा! आपके गले में सर्प है, मुण्डमाल है... मेरा लल्ला आपको देखकर डर जाएगा। आप यहाँ से चले जाइए।"

इस पर महादेव मुस्कुराए और बोले— "मैया, जिसे तुम अपना छोटा सा पुत्र समझ रही हो, वह तो काल का भी काल है। वह किसी से नहीं डरता और न ही उसे किसी की नज़र लग सकती है। वह मुझे पहचानता है।" जब यशोदा नहीं मानीं, तो महादेव वहीं द्वार पर समाधि लगाकर बैठ गए।

बाल कृष्ण की लीला: शिव की समाधि तुड़वाई

अंतर्यामी बाल कृष्ण जान गए कि उनके आराध्य द्वार पर समाधि लगाने जा रहे हैं। वे यह भी जानते थे कि यदि भोले बाबा एक बार समाधि में लीन हो गए, तो हज़ारों वर्षों तक नहीं उठेंगे। प्रभु ने लीला रची और ज़ोर-ज़ोर से रोना शुरू कर दिया। मैया ने बहुत जतन किए, लेकिन कान्हा चुप नहीं हुए। अंत में हारकर मैया को लगा कि शायद इस योगी के दर्शन न कराने के कारण ही लल्ला रो रहा है।

शिव की गोद में मुस्कुराए 'हरि'

जैसे ही यशोदा मैया बाल कृष्ण को बाहर लाईं, महादेव का हृदय गदगद हो गया। उन्होंने कान्हा को अपनी गोद में लेने के लिए एक युक्ति सोची। उन्होंने मैया से कहा, "मैया, तुम बालक के भविष्य के बारे में पूछ रही हो, यदि इसे मेरी गोद में दे दोगी तो मैं इसकी हथेलियों की रेखाएं स्पष्ट देख पाऊँगा।"

जैसे ही कान्हा शिव की गोद में आए, वे खिलखिलाकर हँसने लगे। बाल कृष्ण कभी योगी शिव के गालों को सहलाते, तो कभी उनकी जटाओं और दाढ़ी को खींचने लगते। गोकुल की उस दहलीज पर 'हरि' और 'हर' का वह मिलन ब्रह्मांड का सबसे सुंदर दृश्य बन गया।



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