वाराणसी/प्रयागराज: हिंदू पंचांग के अनुसार, माघ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को 'मौनी अमावस्या' कहा जाता है। इसे सभी अमावस्याओं में सर्वाधिक फलदायी माना गया है। इस साल 2026 में इसकी तारीख को लेकर श्रद्धालुओं के बीच असमंजस की स्थिति है कि यह रविवार को मनाई जाएगी या सोमवार को।
ज्योतिषाचार्यों और पंचांग के अनुसार, इस वर्ष मौनी अमावस्या 18 जनवरी 2026, रविवार को मनाई जाएगी।
पंचांग के अनुसार, माघ अमावस्या तिथि की शुरुआत और समाप्ति का समय इस प्रकार है:
अमावस्या तिथि प्रारंभ: 17 जनवरी 2026 को रात 09:34 बजे से।
अमावस्या तिथि समाप्त: 18 जनवरी 2026 को रात 08:25 बजे तक।
उदया तिथि: चूंकि 18 जनवरी को सूर्योदय के समय अमावस्या तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए मौनी अमावस्या का व्रत और स्नान-दान 18 जनवरी, रविवार को ही किया जाएगा।
मौनी अमावस्या पर पवित्र नदियों में स्नान का विशेष महत्व है, विशेषकर प्रयागराज संगम में।
अमृत काल (सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त): सुबह 07:15 AM से 08:30 AM तक।
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 05:27 AM से 06:21 AM तक।
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:10 PM से 12:53 PM तक।
पितरों की शांति के लिए मौनी अमावस्या का दिन अत्यंत शुभ होता है। तर्पण और श्राद्ध के लिए दोपहर का समय श्रेष्ठ माना जाता है:
कुतप काल: दोपहर 11:50 AM से 12:45 PM तक।
रौहिण काल: दोपहर 12:45 PM से 01:35 PM तक।
अपराह्न काल: दोपहर 01:35 PM से 03:50 PM तक (इस समय में पितरों के निमित्त तर्पण करना शुभ होता है)।
इस दिन मुनि ऋषि के समान आचरण करने की परंपरा है, इसलिए इसे 'मौनी' अमावस्या कहते हैं।
मौन व्रत: शास्त्रों के अनुसार, इस दिन वाणी पर नियंत्रण रखकर मौन व्रत रखने से आत्मबल बढ़ता है और मानसिक शांति प्राप्त होती है।
क्या दान करें? आज के दिन तिल, गुड़, गर्म कपड़े, घी और अन्न का दान करना चाहिए। मान्यता है कि माघ अमावस्या पर किया गया दान 'अश्वमेध यज्ञ' के समान फल देता है।