मथुरा/बरसाना, 22 फरवरी 2026: कान्हा की नगरी में होली का रंग फिजाओं में घुलने लगा है। ब्रज के गांवों में फाग के गीत गूंज रहे हैं और भक्त उस पल का इंतजार कर रहे हैं जब राधा रानी के गांव बरसाना में लाठियाँ बरसेंगी। यदि आप भी इस वर्ष विश्व प्रसिद्ध लट्ठमार होली का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो अपनी डायरी में ये तारीखें अभी नोट कर लें।
ब्रज के 'रंगोत्सव' का मुख्य आकर्षण इन तारीखों में छिपा है:
| तिथि | उत्सव का नाम | स्थान |
| 24 फरवरी (मंगलवार) | लड्डू होली | श्रीजी मंदिर, बरसाना |
| 25 फरवरी (बुधवार) | लट्ठमार होली (बरसाना) | मुख्य रंगीली गली, बरसाना |
| 26 फरवरी (गुरुवार) | लट्ठमार होली (नंदगांव) | नंद भवन, नंदगांव |
| 27 फरवरी (शुक्रवार) | रंगभरनी एकादशी & फूलों की होली | बांके बिहारी मंदिर, वृंदावन |
| 27 फरवरी (शुक्रवार) | सांस्कृतिक रंगोत्सव | श्री कृष्ण जन्मभूमि, मथुरा |
| 01 मार्च (रविवार) | छड़ीमार होली | गोकुल |
| 03 मार्च (मंगलवार) | होलिका दहन | पूरे ब्रज में |
| 04 मार्च (बुधवार) | धुलंडी (मुख्य रंग वाली होली) | मथुरा और पूरे ब्रज में |
लट्ठमार होली राधा-कृष्ण के प्रेम की उस लीला का प्रतीक है, जहाँ कृष्ण (नंदगांव के ग्वाले) बरसाना की गोपियों को छेड़ने आते थे और गोपियां उन्हें लाठियों से डराकर भगाती थीं।
बरसाना (25 फरवरी): यहाँ नंदगांव के 'हुरियारे' (पुरुष) आते हैं और बरसाना की 'हुरियारिन' (महिलाएं) उन पर लाठियाँ बरसाती हैं। पुरुष ढाल से अपना बचाव करते हैं।
नंदगांव (26 फरवरी): अगले दिन बरसाना के पुरुष नंदगांव जाते हैं और वहां की महिलाएं उन पर प्रेम और लाठियों की वर्षा करती हैं।
समय का ध्यान: बरसाना में मुख्य आयोजन दोपहर 2:00 बजे के बाद शुरू होता है, लेकिन भीड़ के कारण सुबह 8:00 बजे तक वहाँ पहुँचना अनिवार्य है। प्रशासन 9:00 बजे के बाद वाहनों का प्रवेश बंद कर देता है।
रजिस्ट्रेशन: चार धाम की तरह यहाँ कोई फीस नहीं है, लेकिन भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने 7 जोन और 18 सेक्टर में सुरक्षा व्यवस्था बांटी है।
क्या पहनें: सफ़ेद सूती कपड़े पहनें और अपने मोबाइल/कैमरे को प्लास्टिक कवर से सुरक्षित रखें।