जगन्नाथ मंदिर के ऊपर क्यों नहीं उड़ते पक्षी? विज्ञान और आस्था की अनसुनी कहानी

जगन्नाथ मंदिर के ऊपर क्यों नहीं उड़ते पक्षी? विज्ञान और आस्था की अनसुनी कहानी

पुरी, ओडिशा: भारत के चार धामों में से एक, जगन्नाथ पुरी मंदिर अपनी भव्यता के साथ-साथ कई अनसुलझे रहस्यों के लिए जाना जाता है। यहाँ हवा के विपरीत लहराता ध्वज हो या मंदिर की छाया का अदृश्य होना, हर बात हैरान करती है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि—क्या वाकई इस मंदिर के ऊपर से कोई पक्षी या हवाई जहाज नहीं गुजरता? आइए, इस रहस्य की परतों को खोलते हैं।

1. धार्मिक मान्यता: गरुड़ देव का पहरा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान जगन्नाथ श्री हरि विष्णु के ही अवतार हैं। विष्णु जी का वाहन 'गरुड़' है, जिन्हें पक्षियों का राजा माना जाता है।

  • मान्यता: भक्तों का विश्वास है कि गरुड़ देव स्वयं अपने स्वामी के मंदिर की रक्षा करते हैं। पक्षियों के राजा की उपस्थिति के कारण अन्य कोई भी पक्षी मर्यादावश या भयवश मंदिर के शिखर के ऊपर से नहीं गुजरता। इसे भगवान की साक्षात उपस्थिति का प्रमाण माना जाता है।

2. वैज्ञानिक दृष्टिकोण: वायु का वेग और 'वोर्टेक्स' (Vortex)

विज्ञान इस घटना को मंदिर की विशिष्ट संरचना और तटीय भूगोल से जोड़कर देखता है:

  • शंक्वाकार बनावट: जगन्नाथ मंदिर लगभग 214 फीट ऊँचा है। इसकी बनावट ऐसी है कि जब समुद्र की तेज हवाएं इससे टकराती हैं, तो मंदिर के ऊपर एक 'वोर्टेक्स' (Vortex) या जटिल वायु-भंवर बन जाता है।

  • पक्षियों के लिए चुनौती: इस ऊँचाई पर हवा का दबाव और दिशा इतनी अनिश्चित होती है कि पक्षियों के लिए वहां संतुलन बनाना और उड़ना शारीरिक रूप से कठिन होता है। इसलिए वे मंदिर के शिखर के ऊपर जाने के बजाय उसके चारों ओर से निकल जाना सुरक्षित समझते हैं।

3. हवाई जहाज और 'नो-फ्लाई ज़ोन' का सच

अक्सर कहा जाता है कि मंदिर के ऊपर से विमान भी नहीं उड़ते। इसके पीछे दो मुख्य कारण हैं:

  • भौगोलिक स्थिति: पुरी किसी मुख्य कमर्शियल फ्लाइट रूट के अंतर्गत नहीं आता है। यहाँ से निकटतम हवाई अड्डा (भुवनेश्वर) लगभग 60 किमी दूर है, इसलिए विमानों का इसके ऊपर से न गुजरना एक सामान्य रूटिंग प्रक्रिया है।

  • आध्यात्मिक सम्मान: यद्यपि नागरिक उड्डयन विभाग (DGCA) ने इसे आधिकारिक तौर पर 'No-Fly Zone' घोषित नहीं किया है, फिर भी सुरक्षा और धार्मिक संवेदनशीलता के कारण यहाँ कम ऊँचाई पर उड़ान भरना वर्जित माना जाता है।

4. नीलचक्र का प्रभाव

मंदिर के शिखर पर नीलचक्र लगा है, जो आठ धातुओं (अष्टधातु) से बना है। वैज्ञानिकों का एक तर्क यह भी है कि इस धातु चक्र के चुंबकीय प्रभाव या धूप में इसकी तेज चमक के कारण भी पक्षी इसके करीब आने से बचते हैं।


निष्कर्ष

जगन्नाथ मंदिर का यह रहस्य आस्थावानों के लिए भगवान की दिव्य शक्ति है, तो जिज्ञासुओं के लिए प्रकृति और वास्तुकला का बेजोड़ तालमेल। चाहे कारण वैज्ञानिक हो या आध्यात्मिक, यह तथ्य आज भी पुरी को दुनिया के सबसे रहस्यमयी स्थानों में से एक बनाए हुए है।



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