वृंदावन, 20 जनवरी 2026: आध्यात्मिक जगत में अक्सर यह सवाल पूछा जाता है कि क्या हम उन गुरुओं से आज भी संवाद कर सकते हैं जो अब भौतिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं? इसी जिज्ञासा का समाधान करते हुए वृंदावन के प्रेमानंद जी महाराज का एक वीडियो आज सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में महाराज जी ने नीम करोली बाबा का उदाहरण देते हुए भक्त और गुरु के बीच के सूक्ष्म संबंधों की व्याख्या की है।
वीडियो में एक भक्त ने महाराज जी से पूछा कि "बाबा, मैं कैंची धाम के नीम करोली बाबा से अपने मन की बात कहना चाहता हूँ, पर वे तो अब शरीर में नहीं हैं। मैं उनसे कैसे जुड़ूँ?" इस पर महाराज जी ने बड़े ही सरल भाव से उत्तर दिया:
हृदय में निवास: प्रेमानंद जी ने कहा कि गुरु कभी कहीं जाते नहीं हैं। वे अपने भक्त के हृदय में ही निवास करते हैं। यदि आपकी श्रद्धा सच्ची है, तो आपको कहीं बाहर जाने या चिल्लाने की जरूरत नहीं है।
मौन संवाद: उन्होंने सिखाया कि आप आँखें बंद करके शांत बैठें और यह महसूस करें कि बाबा आपके सामने हैं। आप अपने मन में जो भी विचार लाएंगे, वह गुरु तक तुरंत पहुँच जाता है क्योंकि वे सर्वव्यापी हैं।
श्रद्धा ही माध्यम है: महाराज जी के अनुसार, गुरु और शिष्य के बीच की दूरी केवल 'अविश्वास' की है। जिस क्षण आप पूर्ण विश्वास कर लेते हैं, संवाद शुरू हो जाता है।
जहाँ नीम करोली बाबा को 'हनुमान जी' का अवतार माना जाता है और उनके कैंची धाम में स्टीव जॉब्स से लेकर मार्क जुकरबर्ग जैसी हस्तियां शांति पाने आती हैं, वहीं प्रेमानंद महाराज आज के समय में राधा-नाम की महिमा के जरिए लाखों युवाओं को सन्मार्ग दिखा रहे हैं।
समानता: दोनों ही संतों ने 'नाम जप' और 'मानवता की सेवा' को ही ईश्वर प्राप्ति का सबसे सरल माध्यम बताया है।
सोशल मीडिया का प्रभाव: प्रेमानंद महाराज के सत्संग के छोटे-छोटे वीडियो क्लिप्स आज की युवा पीढ़ी को नीम करोली बाबा, श्री हित हरिवंश महाप्रभु और अन्य प्राचीन संतों की शिक्षाओं से जोड़ रहे हैं।
महाराज जी ने इस चर्चा के अंत में स्पष्ट किया कि नीम करोली बाबा जैसे महापुरुष समय और स्थान की सीमाओं से परे हैं। यदि आप उनके प्रति प्रेम रखते हैं, तो उनकी शिक्षाओं (जैसे: सबको प्यार करो, सबको खिलाओ, और भगवान का नाम लो) को अपने जीवन में उतारें। यही उनसे बात करने का सबसे प्रभावी तरीका है।