शनि देव को पीपल का वृक्ष अत्यंत प्रिय है। आज सूर्यास्त के बाद किसी पुराने पीपल के पेड़ के पास सरसों के तेल का दीपक जलाएं। दीपक में थोड़े काले तिल जरूर डालें। पीपल की सात बार परिक्रमा करते हुए "ॐ शं शनैश्चराय नमः" का जाप करें।
शनि दोष से मुक्ति के लिए 'छाया दान' सबसे प्रभावी माना जाता है।
एक कांसे या स्टील की कटोरी में सरसों का तेल भरें।
उसमें अपना चेहरा (प्रतिबिंब) देखें।
इसके बाद उस तेल को किसी शनि मंदिर में दान कर दें या डाकोत (शनि का दान लेने वाले) को दे दें।
शास्त्रों के अनुसार, जो भक्त हनुमान जी की पूजा करते हैं, उन्हें शनि देव कभी प्रताड़ित नहीं करते। आज के दिन हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ करने से साढ़ेसाती और ढैय्या के कष्टों में तुरंत राहत मिलती है।
शनि देव 'कर्मफल दाता' हैं और वे दान से प्रसन्न होते हैं। आज के दिन किसी जरूरतमंद या सफाई कर्मचारी को निम्नलिखित वस्तुओं का दान करें:
काली उड़द की दाल, काले तिल, काला कपड़ा।
लोहे के बर्तन या पुराने जूते-चप्पल।
विशेष: आज के दिन सरसों के तेल का दान करना अत्यंत शुभ है।
शनि देव को नीला रंग प्रिय है। आज उन्हें नीले अपराजिता के फूल अर्पित करें। इसके साथ ही शनि मंदिर में बैठकर शनि चालीसा या दशरथकृत शनि स्तोत्र का पाठ करें। यह उपाय मानसिक शांति और करियर में आ रही बाधाओं को दूर करता है।