आज भारत के इतिहास का एक स्वर्णिम अध्याय फिर से जीवंत हो उठा है। प्रथम ज्योतिर्लिंग भगवान सोमनाथ के आधुनिक मंदिर के पुनर्निर्माण और प्राण-प्रतिष्ठा के 75 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित 'सोमनाथ अमृत महोत्सव' आज अपने भव्य शिखर पर पहुँचा। 11 मई 1951 को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने जिस संकल्प को साकार किया था, आज उसी स्थान पर भारत की सांस्कृतिक चेतना का विजय घोष सुनाई दे रहा है।
महोत्सव का मुख्य आकर्षण आज सुबह संपन्न हुआ 'कुंभाभिषेक' समारोह रहा। मंदिर के गगनचुंबी शिखर पर स्थित स्वर्ण कलशों का अभिषेक देश की 11 पवित्र नदियों और समुद्रों के जल से किया गया। इस दौरान पूरा वातावरण 'हर हर महादेव' और 151 शंखों के उद्घोष से गुंजायमान रहा। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच जब वायुसेना के हेलीकॉप्टरों ने मंदिर पर पुष्प वर्षा की, तो उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं की आँखें गौरव से भर आईं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में मंदिर के शिखर पर नया केसरिया विजय ध्वज फहराया गया। यह ध्वज न केवल एक धार्मिक प्रतीक है, बल्कि उस अदम्य इच्छाशक्ति का प्रमाण है जिसने 17 बार के विनाश के बाद भी सोमनाथ को फिर से खड़ा किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने एक विशेष स्मारक सिक्का और डाक टिकट भी जारी किया, जो आने वाली पीढ़ियों को इस ऐतिहासिक दिन की याद दिलाएगा।
महोत्सव का समापन आज शाम एक भव्य 'दीपोत्सव' के साथ होगा, जहाँ अरब सागर के तट पर 1.25 लाख मिट्टी के दीये प्रज्वलित किए जाएंगे। इसके साथ ही, 3D मैपिंग और लाइट-एंड-साउंड शो के माध्यम से मंदिर के 1,000 वर्षों के संघर्ष और गौरव की गाथा दिखाई जाएगी।
The Divine India इस पावन अवसर पर सभी श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं देता है। सोमनाथ का यह शिखर हमें सदैव यह याद दिलाता रहेगा कि निर्माण की शक्ति विनाश की शक्ति से हमेशा बड़ी होती है।