महाकाल का महाशृंगार: भस्म आरती और उसका आध्यात्मिक रहस्य

उज्जैन: 'काल के भी काल' भगवान महाकाल की नगरी उज्जैन में प्रतिदिन होने वाली भस्म आरती विश्व का एकमात्र ऐसा अनुष्ठान है, जहाँ महादेव का शृंगार ताजी भस्म (राख) से किया जाता है। यह आरती केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन और मृत्यु के गहरे दर्शन का प्रतीक है।

1. भस्म आरती का आध्यात्मिक रहस्य

शिव पुराण के अनुसार, शिव 'अघोर' हैं और भस्म उनके शरीर का अभिन्न अंग है।

  • अद्वैत का संदेश: भस्म यह संदेश देती है कि संसार नश्वर है और हर पदार्थ का अंतिम स्वरूप राख ही है।

  • अहंकार का विनाश: जब भक्त महादेव पर भस्म चढ़ते देखते हैं, तो यह उनके भीतर के 'अहंकार' को भस्म करने का प्रतीक माना जाता है।

  • शून्यता: भस्म पवित्रता और शून्यता का प्रतीक है, जहाँ पहुँचकर आत्मा परमात्मा में विलीन हो जाती है।

2. महाशृंगार की प्रक्रिया

ब्रह्म मुहूर्त (प्रातः 4 बजे) में होने वाली इस आरती में महाकाल का अभिषेक जल, दूध, दही, शहद और फलों के रसों से किया जाता है। इसके पश्चात, भांग और सूखे मेवों से बाबा का अद्भुत शृंगार होता है। अंत में, चिता की भस्म (वर्तमान में प्रतीकात्मक भस्म) से महादेव की आरती की जाती है।

3. भस्म आरती का महत्व

मान्यता है कि जो भक्त महाकाल की भस्म आरती के दर्शन कर लेता है, उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता। यह आरती मनुष्य को मृत्यु के सत्य से परिचित कराती है और उसे निर्भय होकर जीने की प्रेरणा देती है।

उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती भगवान शिव की सबसे दिव्य और अनूठी पूजा है, जो प्रतिदिन सुबह 4:00 से 6:00 बजे के बीच होती है। इसमें निराकार महाकाल को गाय के गोबर से बनी भस्म, पंचामृत, त्रिपिंड और रजत चंद्र से श्रृंगारित कर राजा के रूप में पूजा जाता है, जो मृत्यु और नश्वरता का संदेश देती है। 

4. महाकाल की भस्म आरती की मुख्य विशेषताएं:

  • समय और स्थान: यह विश्व प्रसिद्ध आरती महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में तड़के 4 बजे (ब्रह्म मुहूर्त) की जाती है, जिसके लिए महीनों पहले बुकिंग की आवश्यकता होती है।
  • भस्म की मान्यता: प्राचीन काल में श्मशान की राख का उपयोग होता था, लेकिन अब यह भस्म गाय के गोबर, चंदन और अन्य पवित्र सामग्रियों से तैयार की जाती है।
  • श्रृंगार और मान्यता: भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल का दिव्य श्रृंगार किया जाता है। मान्यताओं के अनुसार, भस्म आरती में भगवान शिव का निराकार रूप सामने होता है और वे मृत्यु पर विजय का प्रतीक माने जाते हैं।
  • नियम: आरती के दौरान महिलाओं को घूंघट करना अनिवार्य माना जाता है और पुजारी धोती धारण करते हैं।
  • विशेष अवसर: सावन, महाशिवरात्रि और एकादशी के दौरान यह आरती अत्यंत भव्य होती है, जिसमें दर्शन के लिए भारी भीड़ उमड़ती है। 

भस्म आरती के समय महाकाल का निराकार से साकार रूप में दिव्य श्रंगार दर्शन करना एक अनूठा और अलौकिक अनुभव होता है। 


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