उत्तराखंड की पहाड़ियों में मानसून के सक्रिय होते ही केदारनाथ, बद्रीनाथ और अन्य चारधाम मार्गों पर रुक-रुक कर भारी बारिश और भूस्खलन (Landslides) का सिलसिला शुरू हो गया है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए उत्तराखंड शासन और स्थानीय प्रशासन ने यात्रा के लिए नई मानसून गाइडलाइन्स (Monsoon Travel Alert) जारी की हैं।
अगर आप या आपके परिवार में कोई इस मौसम में बाबा केदार या भगवान बद्रीविशाल के दर्शनों की योजना बना रहा है, तो यात्रा शुरू करने से पहले प्रशासन द्वारा जारी इन जरूरी दिशा-निर्देशों को जरूर पढ़ लें।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पहाड़ी रास्तों (विशेषकर सोनप्रयाग से केदारनाथ और जोशीमठ से बद्रीनाथ) पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कोई जोखिम नहीं लिया जाएगा:
रेड और ऑरेंज अलर्ट पर रोक: मौसम विभाग (IMD) द्वारा भारी बारिश का रेड या ऑरेंज अलर्ट जारी होते ही यात्रियों को सोनप्रयाग, गुप्तकाशी या ऋषिकेश में ही सुरक्षित स्थानों पर रोक दिया जाएगा।
मौसम सामान्य होने पर रवानगी: रास्ता साफ होने और मौसम ठीक होने के बाद ही यात्रियों को आगे बढ़ने की अनुमति दी जाएगी।
रजिस्ट्रेशन चेकिंग: उत्तराखंड सीमा में प्रवेश करने वाले सभी श्रद्धालुओं के लिए आधिकारिक पोर्टल पर चारधाम यात्रा पंजीकरण (Registration) और ई-पास अनिवार्य है।
हेल्पलाइन नंबर एक्टिव: यात्रियों की सहायता के लिए प्रशासन ने 24x7 कंट्रोल रूम और इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं ताकि किसी भी भूस्खलन या इमरजेंसी की स्थिति में तुरंत मदद पहुंचाई जा सके।
आवश्यक दवाइयां और रैनकोट: यात्रा के दौरान अपने साथ वाटरप्रूफ रैनकोट, ग्रिप वाले ट्रेकिंग शूज़, टॉर्च और अपनी नियमित दवाइयां जरूर रखें।
रात में सफर करने से बचें: पहाड़ों पर रात के समय लैंडस्लाइड का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए शाम ढलने के बाद पहाड़ी रास्तों पर वाहन चलाने या पैदल चलने से बचें।
स्थानीय पुलिस के निर्देशों का पालन: जहां भी पुलिस प्रशासन यात्रियों को रुकने के लिए कहे, वहां धैर्य बनाए रखें और निर्देशों का पालन करें।
केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम की यात्रा आस्था और भक्ति का अनुपम संगम है, लेकिन मानसून के समय प्रकृति का रुख थोड़ा कड़ा हो जाता है। प्रशासन के नियमों का पालन करके और मौसम की सही जानकारी लेकर ही अपनी यात्रा का आनंद लें। 'जय बाबा केदार, जय बद्रीविशाल'!