सावन के पवित्र महीने की शुरुआत के साथ ही कांवड़ यात्रा 2026 का भव्य शुभारंभ हो चुका है। हरिद्वार, ऋषिकेश और गोमुख से जल लेकर लौटने वाले लाखों कांवड़ियों की सुरक्षा और सुगम आवागमन के लिए उत्तर प्रदेश, दिल्ली और उत्तराखंड पुलिस ने बड़े पैमाने पर ट्रैफिक डायवर्जन और सुरक्षा व्यवस्था लागू कर दी है।
अगर आप भी अगले कुछ दिनों में दिल्ली-एनसीआर, मेरठ, मुजफ्फरनगर या हरिद्वार की तरफ यात्रा करने वाले हैं, तो निकलने से पहले ट्रैफिक पुलिस द्वारा जारी नए रूट और गाइडलाइंस जरूर जान लें।
दिल्ली-हरिद्वार हाईवे (NH-58): मुजफ्फरनगर और मेरठ जोन में 30 जुलाई से भारी वाहनों (HTVs) का प्रवेश रोक दिया गया है। वहीं 4 अगस्त से इस हाईवे और गंग नहर पटरी मार्ग पर सामान्य वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बंद रहेगी।
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे: 7 अगस्त से 12 अगस्त के बीच दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे को केवल डाक कांवड़ियों और पैदल कांवड़ियों के लिए आरक्षित रखा जाएगा।
दिल्ली-एनसीआर में डायवर्जन: दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने सीमापुरी, अप्सरा बॉर्डर, वजीराबाद रोड और भोपुरा बॉर्डर से भारी वाहनों को एनएच-9 (NH-9) और एनएच-44 की तरफ डायवर्ट कर दिया है।
सीसीटीवी और ड्रोन से निगरानी: मेरठ मंडल और दिल्ली-यूपी सीमाओं पर 7,000 से अधिक AI-सक्षम सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन के जरिए 24 घंटे निगरानी रखी जा रही है।
मेडिकल कैंप व एम्बुलेंस: कांवड़ मार्गों पर जगह-जगह राहत शिविर, अस्थायी अस्पताल और 65 से अधिक एम्बुलेंस की तैनाती की गई है ताकि पैर के छालों व आपात स्थिति में कांवड़ियों को त्वरित इलाज मिल सके।
मांस-मदिरा की दुकानों पर प्रतिबंध: कांवड़ यात्रा के निर्धारित मुख्य मार्गों से शराब और नॉन-वेज दुकानों को अस्थायी रूप से हटाने का आदेश जारी किया गया है।
वैकल्पिक मार्ग अपनाएं: दिल्ली से देहरादून/हरिद्वार जाने वाले यात्री ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे (EPE) या दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर का इस्तेमाल करें।
समय का ध्यान रखें: बसों और टैक्सियों का रूट लंबा होने के कारण यात्रा समय में अतिरिक्त 1 से 2 घंटे का समय मानकर चलें।
रात का सफर संभालकर करें: हाईवे का एक पूरा हिस्सा (कैरिजवे) शिवभक्तों के लिए रिजर्व रहेगा, इसलिए गाड़ी धीमी गति से चलाएं।
कांवड़ यात्रा आस्था और असीम श्रद्धा का प्रतीक है। लाखों शिवभक्त तपती धूप और बारिश में नंगे पांव सैकड़ों किलोमीटर की दूरी तय करते हैं। एक जिम्मेदार नागरिक के तौर पर ट्रैफिक नियमों का पालन करें, कांवड़ियों को रास्ता दें और इस पावन यात्रा में अपनी भूमिका निभाएं। 'बोल बम, बम-बम भोले'!