बसंत पंचमी 2026: सरस्वती पूजा की तैयारियां शुरू - जानें 1 फरवरी का शुभ मुहूर्त, 'विद्यारंभ' संस्कार और पीले रंग का महत्व

नई दिल्ली/वाराणसी, 19 जनवरी 2026: मौनी अमावस्या के समापन के साथ ही अब पूरे देश में ऋतुराज बसंत के स्वागत की तैयारियां तेज हो गई हैं। विद्या, बुद्धि और कला की देवी माँ सरस्वती को समर्पित बसंत पंचमी का त्योहार इस वर्ष 1 फरवरी 2026, रविवार को मनाया जाएगा। शिक्षण संस्थानों से लेकर मंदिरों तक, हर जगह अभी से ही उत्सव का माहौल बनने लगा है।

बसंत पंचमी 2026: शुभ मुहूर्त (Puja Muhurat)

पंचांग के अनुसार, पंचमी तिथि का सूर्योदय के समय होना इस पर्व के लिए अनिवार्य माना जाता है:

  • पंचमी तिथि प्रारंभ: 31 जनवरी 2026 को रात 10:45 बजे से।

  • पंचमी तिथि समाप्त: 1 फरवरी 2026 को रात 09:15 बजे तक।

  • सरस्वती पूजा का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त: 1 फरवरी की सुबह 07:10 AM से दोपहर 12:35 PM तक (अमृत काल और अभिजीत मुहूर्त का संयोग इसे विशेष फलदायी बना रहा है)।

विद्यारंभ संस्कार और 'अक्षर अभ्यास'

बसंत पंचमी को बच्चों की शिक्षा की शुरुआत के लिए सबसे शुभ दिन माना जाता है।

  • अक्षर अभ्यास: दक्षिण भारत से लेकर उत्तर भारत तक, आज के दिन छोटे बच्चों को पहली बार स्लेट पर अक्षर लिखना सिखाया जाता है, जिसे 'विद्यारंभ' संस्कार कहते हैं।

  • मान्यता: माना जाता है कि आज के दिन शिक्षा शुरू करने वाले बच्चों पर माँ सरस्वती की कृपा सदैव बनी रहती है।

पीले रंग का जादू: क्यों पहनते हैं पीले वस्त्र?

बसंत पंचमी के दिन चारों ओर पीला रंग छाया रहता है। इसके पीछे धार्मिक और प्राकृतिक दोनों कारण हैं:

  1. प्रकृति का श्रृंगार: इस समय खेतों में सरसों के पीले फूल लहलहाने लगते हैं, जो प्रकृति के उत्सव का प्रतीक हैं।

  2. सकारात्मकता: पीला रंग ज्ञान, ऊर्जा और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।

  3. भगवान का प्रिय रंग: सरस्वती पूजा में माँ को पीले फूल (गेंदा), पीला चंदन और पीला भोग (मीठे चावल) अर्पित किया जाता है।

प्रमुख आयोजनों की तैयारी

  • अयोध्या और काशी: उत्तर प्रदेश के प्रमुख मंदिरों में विशेष 'बसंत उत्सव' की तैयारी शुरू हो चुकी है, जहाँ देवी का भव्य श्रृंगार किया जाएगा।

  • स्कूल और कॉलेज: शिक्षण संस्थानों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों और सरस्वती वंदना के लिए रिहर्सल शुरू हो गई है।


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