जोहान्सबर्ग, 7 जनवरी 2026: दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में स्थित BAPS हिंदू मंदिर परिसर ने एक नया इतिहास रच दिया है। यहाँ भगवान स्वामीनारायण के किशोर रूप नीलकंठ वर्णी की 42 फीट ऊंची कांस्य प्रतिमा का भव्य अनावरण किया गया। यह प्रतिमा अब आधिकारिक रूप से दक्षिण अफ्रीका की सबसे ऊंची कांस्य प्रतिमा बन गई है और पूरे अफ्रीकी महाद्वीप की चौथी सबसे ऊंची प्रतिमा का दर्जा रखती है।
इंजीनियरिंग का अद्भुत नमूना लगभग 20 टन वजनी यह प्रतिमा मुख्य रूप से तांबे और पीतल से बनी है। इस प्रतिमा की सबसे बड़ी विशेषता इसकी 'वृक्षासन' (एक पैर पर खड़े होना) योग मुद्रा है। विशेषज्ञों के अनुसार, इतनी भारी प्रतिमा को केवल एक पैर पर संतुलित करना इंजीनियरिंग का एक असाधारण कारनामा है। यह मुद्रा अनुशासन, मानसिक एकाग्रता और आंतरिक संतुलन का संदेश देती है।
सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व नीलकंठ वर्णी भगवान स्वामीनारायण के उस रूप को दर्शाते हैं, जब उन्होंने मात्र 11 वर्ष की आयु में 7 वर्षों तक पूरे भारतीय उपमहाद्वीप की 12,000 किलोमीटर की कठिन पदयात्रा की थी।
अनावरण समारोह: इस ऐतिहासिक समारोह का नेतृत्व BAPS के वरिष्ठ संत परम पूज्य डॉक्टर स्वामी ने किया।
प्रमुख अतिथि: समारोह में दक्षिण अफ्रीका के उप वित्त मंत्री एशोर सरुपेन सहित कई अंतरराष्ट्रीय गणमान्य व्यक्तियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के दौरान 60 सदस्यीय भारत-अफ्रीकी ऑर्केस्ट्रा ने अपनी प्रस्तुति से समां बांध दिया।
पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा मंदिर प्रशासन का मानना है कि यह विशाल प्रतिमा न केवल आध्यात्मिक शांति का केंद्र बनेगी, बल्कि जोहान्सबर्ग के पर्यटन मानचित्र पर भी एक प्रमुख स्थान के रूप में उभरेगी। मंदिर परिसर के पास स्थित 'शायोना' शाकाहारी रेस्टोरेंट और सुंदर बगीचे इसे परिवारों के लिए एक आदर्श स्थान बनाते हैं।