वेरावल (गुजरात), 9 जनवरी 2026: भारत के प्रथम ज्योतिर्लिंग, श्री सोमनाथ मंदिर में एक नए डिजिटल युग की शुरुआत होने जा रही है। सोमनाथ ट्रस्ट ने 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' (1026–2026) के उपलक्ष्य में एक अत्याधुनिक 'थ्री-डी इमर्सिव म्यूजियम' (3D Immersive Museum) के निर्माण की घोषणा की है। यह संग्रहालय न केवल सोमनाथ मंदिर के 1,000 वर्षों के संघर्ष और पुनरुत्थान की गाथा सुनाएगा, बल्कि भक्तों को एक ही स्थान पर सभी 12 ज्योतिर्लिंगों के वर्चुअल दर्शन भी कराएगा।
यह संग्रहालय पारंपरिक म्यूजियम से बिल्कुल अलग होगा। इसमें निम्नलिखित तकनीकों का उपयोग किया जाएगा:
होलोग्राम और वीआर (VR): वर्चुअल रियलिटी के माध्यम से भक्त प्राचीन काल के उस भव्य सोमनाथ मंदिर का अनुभव कर सकेंगे, जिसका वर्णन ऋग्वेद और स्कंद पुराण में मिलता है।
12 ज्योतिर्लिंगों की यात्रा: संग्रहालय में एक विशेष सेक्शन होगा जहाँ 3D मैपिंग के जरिए केदारनाथ से लेकर रामेश्वरम तक के सभी 12 ज्योतिर्लिंगों की उत्पत्ति और उनके महात्म्य को जीवंत रूप में दिखाया जाएगा।
ऐतिहासिक पुनरुत्थान: 1026 ईस्वी में महमूद गजनवी के आक्रमण से लेकर 1951 में सरदार पटेल के प्रयासों से मंदिर के पुनर्निर्माण तक की यात्रा को 'लाइट एंड साउंड' के नए डिजिटल फॉर्मेट में प्रदर्शित किया जाएगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' का उल्लेख करते हुए कहा था कि 2026 का वर्ष सोमनाथ के लिए दोहरा महत्व रखता है।
यह मंदिर पर हुए पहले बड़े आक्रमण (1026 ई.) के 1,000 वर्ष पूरे होने का प्रतीक है।
यह आधुनिक मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा (1951 ई.) के 75 वर्ष पूरे होने का भी अवसर है।
सोमनाथ ट्रस्ट के अनुसार, इस हाई-टेक संग्रहालय का उद्देश्य युवा पीढ़ी को सनातन धर्म के गौरवशाली इतिहास और स्थापत्य कला (Kailas Mahameru Prasad Style) से रूबरू कराना है। संग्रहालय के साथ-साथ यहाँ एक 'स्मार्ट डिजिटल प्लाजा' भी बनाया जा रहा है, जहाँ भक्तों को मंदिर से जुड़ी हर जानकारी उनकी उंगलियों पर उपलब्ध होगी।