अन्वाधान और इष्टि व्रत कैलेंडर 2026: जानिए क्या है अन्वाधान और इष्टि? यहां देखें साल 2026 की सभी तिथियां और धार्मिक महत्व

महत्वपूर्ण जानकारी

  • जून 2026
  • अनवधान: 28 जून, 2026 (रविवार - अमावस्या)
  • इष्टी: 29 जून 2026 (सोमवार - प्रतिपदा)

सनातन हिंदू धर्म में कई ऐसे सूक्ष्म और गहरे वैदिक नियम हैं, जिनका पालन करने से व्रत और पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है। आमतौर पर लोग एकादशी, पूर्णिमा और अमावस्या के व्रतों के बारे में जानते हैं, लेकिन वैष्णव संप्रदाय और पूर्ण वैदिक रीति-रिवाज से जुड़े श्रद्धालु हर महीने 'अन्वाधान' (Anvadhan) और 'इष्टि' (Ishti) नियमों का कड़ाई से पालन करते हैं।

यदि आप भी अपने जीवन में सुख, समृद्धि और मानसिक शांति चाहते हैं, तो इन दो वैदिक प्रक्रियाओं को समझना आपके लिए बेहद ज़रूरी है। 'द डिवाइन इंडिया' के इस विशेष लेख में हम आपको बेहद सरल शब्दों में समझाएंगे कि अन्वाधान और इष्टि क्या हैं, इनका महत्व क्या है और साल 2026 के बचे हुए महीनों में ये तिथियां कब-कब आ रही हैं।

1. सरल शब्दों में समझें: क्या है अन्वाधान और इष्टि?

  • अन्वाधान (Anvadhan) क्या है?: 'अन्वाधान' का शाब्दिक अर्थ होता है— 'अग्नि को पुनः स्थापित करना या उसमें ईंधन डालना'। धार्मिक दृष्टि से, पूर्णिमा या अमावस्या के व्रत के मुख्य दिन से एक दिन पहले, अपनी इंद्रियों को शुद्ध करने, व्रत का संकल्प लेने और यज्ञ की अग्नि को जीवित रखने की प्रक्रिया को अन्वाधान कहा जाता है। इस दिन व्रती (व्रत रखने वाला) मानसिक रूप से खुद को अगले दिन की मुख्य पूजा के लिए तैयार करता है।

  • इष्टि (Ishti) क्या है?: 'इष्टि' का अर्थ होता है— 'अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए किया जाने वाला छोटा यज्ञ या अनुष्ठान'। व्रत की समाप्ति या पारण के दिन, जब भगवान विष्णु या अपने इष्ट देव की प्रसन्नता और अपनी आध्यात्मिक कामनाओं के लिए हवन या विशेष आहुति दी जाती है, उसे इष्टि कहा जाता है। यह आमतौर पर प्रतिपदा (महीने के पहले दिन) को किया जाता है।

2. इष्टि और अन्वाधान व्रत कैलेंडर 2026 (Tithi Calendar)

आपकी सुविधा के लिए, यहाँ वर्ष 2026 के मुख्य महीनों के लिए अन्वाधान और इष्टि की प्रामाणिक तिथियों की तालिका (Table) दी जा रही है:

महीना (2026)अन्वाधान तिथि (Anvadhan)इष्टि तिथि (Ishti)
जून 202628 जून 2026 (रविवार - अमावस्या)29 जून 2026 (सोमवार - प्रतिपदा)
जुलाई 2026

13 जुलाई 2026 (सोमवार - पूर्णिमा)

28 जुलाई 2026 (मंगलवार - अमावस्या)

14 जुलाई 2026 (मंगलवार - प्रतिपदा)

29 जुलाई 2026 (बुधवार - प्रतिपदा)

अगस्त 2026

11 अगस्त 2026 (मंगलवार - पूर्णिमा)

27 अगस्त 2026 (गुरुवार - अमावस्या)

12 अगस्त 2026 (बुधवार - प्रतिपदा)

28 अगस्त 2026 (शुक्रवार - प्रतिपदा)

सितंबर 2026

10 सितंबर 2026 (गुरुवार - पूर्णिमा)

25 सितंबर 2026 (शुक्रवार - अमावस्या)

11 सितंबर 2026 (शुक्रवार - प्रतिपदा)

26 सितंबर 2026 (शनिवार - प्रतिपदा)

अक्टूबर 2026

10 अक्टूबर 2026 (शनिवार - पूर्णिमा)*

25 अक्टूबर 2026 (रविवार - अमावस्या)

11 अक्टूबर 2026 (रविवार - प्रतिपदा)*

26 अक्टूबर 2026 (सोमवार - प्रतिपदा)

नवंबर 2026

08 नवंबर 2026 (रविवार - पूर्णिमा)*

23 नवंबर 2026 (सोमवार - अमावस्या)

09 नवंबर 2026 (सोमवार - प्रतिपदा)*

24 नवंबर 2026 (मंगलवार - प्रतिपदा)

दिसंबर 2026

08 दिसंबर 2026 (मंगलवार - पूर्णिमा)*

23 दिसंबर 2026 (बुधवार - अमावस्या)

09 दिसंबर 2026 (बुधवार - प्रतिपदा)*

24 दिसंबर 2026 (गुरुवार - प्रतिपदा)

3. इस नियम के पालन से क्या लाभ होता है?

  • पितृ दोष से मुक्ति: अमावस्या के समय अन्वाधान और इष्टि करने से पितर अत्यंत प्रसन्न होते हैं और वंश को आशीर्वाद देते हैं।

  • संकल्प की शक्ति: यह प्रक्रिया हमें सिखाती है कि कोई भी व्रत केवल भूखे रहने का नाम नहीं है, बल्कि उसके पीछे एक व्यवस्थित अनुशासन और ब्रह्मांडीय ऊर्जा से जुड़ने का विज्ञान है।




प्रश्न और उत्तर


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