सावन शिवरात्रि 2022

सावन शिवरात्रि 2022

महत्वपूर्ण जानकारी

सावन शिवरात्रि जो कि सावन मास के कृष्ण पक्ष के दौरान चतुर्दशी तिथि को सावन शिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है। एक वर्ष में 12 शिवरात्रि होती है जो प्रत्येक महीनें में आती है परन्तु सावन की शिवरात्रि विशेष होती है। भगवान शिव को सावन का महीना अति प्रिय होता है। शिव भक्त पूरे वर्ष अर्थात् मासिक शिवरात्रि का व्रत करते है परन्तु जो प्रत्येक मासिक शिवरात्रि का व्रत नहीं कर पाता तो वह सावन की शिवरात्रि का व्रत आवश्य करना चाहिए।
कुछ शिव भक्त सावन की शिवरात्रि में महा रूद्र-अभिषेक का आयोजन करने है। जिससे भगवान शिव की कृपा पाकर सुख, शांति और महोदव का आर्शीवाद प्राप्त कर सकें।

श्रावण मास में पड़ने वाली शिवरात्रि को सावन शिवरात्रि के नाम से जाना जाता है। चूंकि पूरा श्रावण मास शिव पूजा करने के लिए समर्पित है, सावन महीने के दौरान मास शिवरात्रि अत्यधिक शुभ मानी जाती है।

सावन की शिवरात्रि को काँवड़ यात्रा का समापन भी कहा जा सकता है।

काँवड़ यात्रा में उत्तर भारत के विभिन्न हिस्सों, विशेषकर पश्चिम उत्तर प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली से लाखों भक्त भाग लेते है। जोकि हरिद्वार व गौमुख से अपनी यात्रा आरंभ करते है तथा अपने निवास स्थान अपने साथ लाये गये पवित्र गंगाजल से वह विशेषकर शिवरात्री के दिन मंदिरों में शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं।

भारत के राज्यों में सावन शिवरात्रि

उत्तर भारत में प्रसिद्ध शिव मंदिर, काशी विश्वनाथ और केदारनाथ मंदिर में सावन महीने के दौरान विशेष पूजा को आयोजन करते हैं। सावन के महीने में हजारों शिव भक्त शिव मंदिरों में जाते हैं और गंगाजल व दूध से अभिषेक करते हैं।

सावन मास की शिवरात्रि उत्तरी भारत के राज्यों में अधिक प्रसिद्ध है जैसे उत्तराखंड, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और बिहार। इन राज्यों में पूर्णिमांत चंद्र कैलेंडर का पालन किया जाता है। भारत के अन्य राज्यों में जैसे आंध्र प्रदेश, गोवा, महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात और तमिलनाडु। इन राज्यों में अमावसंत चंद्र कैलेंडर का पालन किया जाता है। इन राज्यों शिवरात्रि आषाढ़ में आने शिवरात्रि विशेष होती है।

हालांकि, सबसे महत्वपूर्ण शिवरात्रि जिसे महा शिवरात्रि के रूप में जाना जाता है, फरवरी या मार्च के दौरान आती है।

कैस करें पूजा शिरात्रि पर

  • इस दिन को ब्रह्म मुहूर्त में सोकर उठें और स्नानादि से निवृत्त हो जाएं।
  • गंगा जल या पवित्र जल पूरे घर में छिड़कें।
  • शिव लिंग अभिषेक के साथ पूजा प्रारंभ करनी चाहिए।
  • अभिषेक के बाद बेलपत्र, समीपत्र, दूब, कुशा, कमल, नीलकमल, जंवाफूल कनेर, राई फूल आदि से शिवजी को प्रसन्न किया जाता है।
  • भगवान शिव का ध्यान करना चाहिए।
  • ध्यान के पश्चात ’ॐ नमः शिवाय’ से शिवजी का पूजन करें। आरती कर प्रसाद वितरण करें।

भगवान शिव के प्रमुख मंदिर:





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