अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव 2026: गुजरात के आसमान में बिखरे सतरंगी रंग; पीएम मोदी ने दी उत्तरायण की शुभकामनाएं

अहमदाबाद, 14 जनवरी 2026: गुजरात का जीवंत उत्साह आज अपने चरम पर पहुंच गया है क्योंकि साबरमती रिवरफ्रंट के ऊपर का आसमान अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव (उत्तरायण) के लिए एक रंगीन कैनवास में बदल गया है। सूर्य के उत्तरायण (उत्तरी गोलार्ध में प्रवेश) का जश्न मनाने के लिए राज्य भर में विभिन्न स्थानों पर हजारों लोग एकत्र हुए हैं। विशाल पेशेवर पतंगों से लेकर पारंपरिक कागजी पतंगों तक, इस उत्सव ने एक बार फिर भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और इसके बढ़ते वैश्विक आकर्षण को प्रदर्शित किया है।

साबरमती रिवरफ्रंट पर उत्सव के मुख्य आकर्षण

इस वर्ष, महोत्सव में 50 से अधिक देशों के प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जो अहमदाबाद में अपनी अनूठी पतंग डिजाइन और उड़ाने की तकनीक लेकर आए।

  • विशाल पतंगें और इन्फ्लेटेबल्स: मुख्य आकर्षण बाघों, पौराणिक पात्रों और यहाँ तक कि "डिजिटल इंडिया" थीम वाली ड्रोन-शैली की विशाल इन्फ्लेटेबल पतंगें रहीं।

  • दिग्गजों की उपस्थिति और शुभकामनाएं: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया के माध्यम से देशवासियों को उत्तरायण की बधाई दी और इस त्योहार के उत्साह एवं सद्भाव के संदेश को रेखांकित किया। अहमदाबाद और सूरत में कई शीर्ष नेताओं और बॉलीवुड सितारों को भी छतों पर 'काय पो छे!' के नारों के साथ जश्न मनाते देखा गया।

  • आर्थिक तेजी: जमालपुर और रायपुर के स्थानीय पतंग बाजार पिछले कुछ दिनों से 24/7 खुले रहे, जहाँ पारंपरिक मांझे और कागजी पतंगों की रिकॉर्ड बिक्री दर्ज की गई।

सुरक्षा सर्वोपरि: "पक्षी-सुरक्षित" मांझे पर ध्यान

उत्सव की भव्यता दिखाने वाले वायरल वीडियो के बीच, गुजरात सरकार और एनजीओ ने सुरक्षा को लेकर एक व्यापक जागरूकता अभियान शुरू किया है।

  • नायलॉन मांझे पर प्रतिबंध: चीनी या नायलॉन (कांच की परत वाले) मांझे की बिक्री पर सख्त कार्रवाई की जा रही है, जो पक्षियों और राहगीरों के लिए घातक साबित होता है।

  • पक्षियों को बचाएं: वन विभाग द्वारा पतंगबाजी के दौरान घायल हुए पक्षियों को बचाने के लिए विशेष हेल्पलाइन नंबर स्थापित किए गए हैं।

  • यात्रियों की सुरक्षा: दोपहिया वाहन चालकों को सलाह दी गई है कि वे आवारा पतंग की डोर से लगने वाली चोटों से बचने के लिए अपने वाहनों पर "नेक गार्ड" (तार रक्षक) लगवाएं।

'काय पो छे!' का उत्साह

गुजरात में उत्तरायण केवल पतंगों के बारे में नहीं है; यह एक सामुदायिक उत्सव है। सुबह से ही परिवार छतों पर जमा हो गए हैं और ऊंधियू, जलेबी और तिल की चिक्की जैसे पारंपरिक व्यंजनों का आनंद ले रहे हैं। पूरे दिन ऊर्जा का स्तर ऊंचा बना रहता है, और रात के समय आसमान में तुक्कल (कागजी लालटेन) का खूबसूरत नजारा इस उत्सव का समापन करता है।


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