तुंगनाथ मंदिर: दुनिया के सबसे ऊंचे शिव मंदिर को झुकने से बचाने के लिए ASI ने शुरू किया संरक्षण कार्य

तुंगनाथ मंदिर: दुनिया के सबसे ऊंचे शिव मंदिर को झुकने से बचाने के लिए ASI ने शुरू किया संरक्षण कार्य

रुद्रप्रयाग (उत्तराखंड), 9 जनवरी 2026: हिमालय की गोद में समुद्र तल से 12,070 फीट की ऊंचाई पर स्थित दुनिया के सबसे ऊंचे शिव मंदिर, तुंगनाथ, के अस्तित्व को बचाने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने एक बड़ा मिशन शुरू किया है। हालिया वैज्ञानिक रिपोर्टों में मंदिर के मुख्य ढांचे में 5 से 6 डिग्री के झुकाव और कुछ पत्थरों के खिसकने की पुष्टि हुई थी। आज से मंदिर की नींव को मजबूती देने और पत्थरों के संरक्षण के लिए विशेष 'केमिकल क्लीनिंग' प्रक्रिया की शुरुआत की गई है।

क्यों जरूरी है यह संरक्षण? (Significance and Threats)

पंच केदार में से एक, तुंगनाथ मंदिर सहस्राब्दियों पुराना है और कत्यूरी शैली की स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना है। मंदिर को सुरक्षित रखना निम्नलिखित कारणों से चुनौतीपूर्ण है:

  1. प्राकृतिक मार: भारी बर्फबारी और अत्यधिक ठंड के कारण पत्थरों में दरारें और 'मोस' (काई) की समस्या पैदा हो गई है।

  2. भूगर्भीय हलचल: हिमालयी क्षेत्र में होने वाली सूक्ष्म हलचलों के कारण मंदिर का ढांचा एक ओर झुकने लगा था।

  3. पत्थरों का क्षरण: प्राचीन पत्थरों की चमक और मजबूती को बरकरार रखने के लिए 'केमिकल कोटिंग' की आवश्यकता है।

ASI की कार्ययोजना (Conservation Plan 2026)

एएसआई के विशेषज्ञों की टीम ने मंदिर परिसर में डेरा डाल दिया है। इस संरक्षण कार्य में निम्नलिखित कदम उठाए जा रहे हैं:

  • केमिकल क्लीनिंग: बाहरी दीवारों पर जमी काई और एसिड रेन के असर को हटाने के लिए विशेष रसायनों का उपयोग किया जा रहा है।

  • ग्राउटिंग तकनीक: मंदिर की नींव के बीच खाली हुए गैप को भरने के लिए विशेष सामग्री (Grouting) डाली जा रही है ताकि झुकाव को और बढ़ने से रोका जा सके।

  • डिजिटल मॉनिटरिंग: ढांचे के झुकाव पर नजर रखने के लिए 'सेंसर' लगाए गए हैं, जो हर महीने की डेटा रिपोर्ट देंगे।

यात्रा संबंधी सलाह

यदि आप 2026 में तुंगनाथ दर्शन की योजना बना रहे हैं, तो कृपा ध्यान दें कि करण मंदिर के गर्भ-गृह में प्रवेश संभव है। ट्रैकिंग के लिए चोपता से 4 किमी का रास्ता खुला है।

पंच केदार का गौरव

मान्यता है कि तुंगनाथ मंदिर का निर्माण पांडवों ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए किया था। यह मंदिर न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि ट्रैकिंग के शौकीनों के लिए भी सबसे पसंदीदा स्थान है। मंदिर प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि संरक्षण कार्य के दौरान श्रद्धालुओं के लिए दर्शन की व्यवस्था सुचारू रहेगी, लेकिन मुख्य ढांचे के पास कुछ प्रतिबंध लागू हो सकते हैं।



प्रश्न और उत्तर



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