अबू धाबी: BAPS हिंदू मंदिर की दूसरी वर्षगांठ की तैयारी, 'शांति और सद्भाव' उत्सव का होगा आयोजन

अबू धाबी: BAPS हिंदू मंदिर की दूसरी वर्षगांठ की तैयारी, 'शांति और सद्भाव' उत्सव का होगा आयोजन

अबू धाबी (UAE), 5 जनवरी 2026: मध्य पूर्व (Middle East) के पहले पारंपरिक पत्थर के मंदिर, BAPS हिंदू मंदिर अबू धाबी, ने अपनी दूसरी वर्षगांठ के उपलक्ष्य में भव्य कार्यक्रमों की श्रृंखला की घोषणा की है। फरवरी 2026 में होने वाले मुख्य उत्सव से पहले, आज मंदिर परिसर में एक विशेष 'प्री-इवेंट' प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया। इस सभा में न केवल भारतीय समुदाय, बल्कि विभिन्न देशों के राजनयिकों और स्थानीय अमीराती अधिकारियों ने भी हिस्सा लिया, जो वैश्विक स्तर पर बढ़ते 'सांस्कृतिक सद्भाव' का प्रतीक है।

सांस्कृतिक एकता का वैश्विक केंद्र

पिछले दो वर्षों में, अबू धाबी का यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं रह गया है, बल्कि यह शांति और सह-अस्तित्व का एक वैश्विक केंद्र बन चुका है।

  • बढ़ती लोकप्रियता: मंदिर प्रशासन के अनुसार, पिछले एक साल में हर महीने औसतन 2 से 3 लाख अंतरराष्ट्रीय पर्यटक मंदिर के दर्शन करने पहुंचे हैं।

  • स्थापत्य कला का चमत्कार: गुलाबी बलुआ पत्थर और सफेद संगमरमर से बना यह मंदिर अपनी जटिल नक्काशी के लिए जाना जाता है, जिसमें भारत की प्राचीन कला के साथ-साथ अरब संस्कृति के तत्वों को भी पिरोया गया है।

वर्षगांठ उत्सव की मुख्य विशेषताएं:

  1. शांति और सद्भाव महोत्सव: दूसरी वर्षगांठ के अवसर पर एक सप्ताह का विशेष उत्सव मनाया जाएगा, जिसमें 'वैश्विक शांति' के लिए विशेष यज्ञ और प्रार्थनाएं होंगी।

  2. सांस्कृतिक प्रदर्शनी: मंदिर परिसर में एक नई डिजिटल प्रदर्शनी का उद्घाटन किया जाएगा, जो भारत और UAE के बीच सदियों पुराने व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंधों को दर्शाएगी।

  3. युवा सम्मेलन: उत्सव के दौरान प्रवासी भारतीय युवाओं के लिए विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे, ताकि वे अपनी जड़ों और मानवीय मूल्यों से जुड़ सकें।

UAE सरकार का अटूट सहयोग

अबू धाबी के क्राउन प्रिंस और UAE सरकार के निरंतर सहयोग की सराहना करते हुए, मंदिर के प्रतिनिधियों ने कहा कि यह मंदिर 'सहिष्णुता' (Tolerance) का जीता-जागता उदाहरण है। रेगिस्तान के बीचों-बीच स्थित यह मंदिर आज दुनिया भर के लोगों को 'वसुधैव कुटुंबकम' (दुनिया एक परिवार है) का संदेश दे रहा है।

निष्कर्ष: BAPS हिंदू मंदिर की दूसरी वर्षगांठ न केवल इस भव्य संरचना का उत्सव है, बल्कि यह आधुनिक युग में अलग-अलग धर्मों और संस्कृतियों के बीच बढ़ते सम्मान और प्रेम की जीत है।



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