जब हम प्रभु श्री राम और माता सीता की पावन गाथा को याद करते हैं, तो हमारा मन स्वतः ही अयोध्या के साथ-साथ जनकपुर की ओर खिंचा चला जाता है। नेपाल के तराई क्षेत्र (धनुषा जिले) में स्थित 'जानकी मंदिर' (Janaki Mandir) न केवल सनातन धर्म के सबसे पूजनीय स्थलों में से एक है, बल्कि यह भारत और नेपाल के अटूट सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों का सबसे सुंदर प्रतीक भी है।
यह वह पावन भूमि है जिसे मिथिला के राजा जनक की पुत्री, जगत जननी माता सीता (जानकी) का जन्मस्थान और उनके भव्य स्वयंवर का साक्षी माना जाता है। आइए, 'द डिवाइन इंडिया' के इस विशेष लेख में जानते हैं इस मंदिर का इतिहास, इसकी वास्तुकला और इससे जुड़े कुछ बेहद अनोखे रहस्य।
जनकपुरधाम का यह मुख्य मंदिर आज जिस भव्य स्वरूप में दिखाई देता है, उसका निर्माण आधुनिक काल में हुआ है।
टीकमगढ़ की रानी का योगदान: इस भव्य मंदिर का निर्माण सन 1910 ईस्वी में भारत के मध्य प्रदेश में स्थित टीकमगढ़ (ओरछा राज्य) की रानी वृषभानु कुंवारी ने करवाया था।
9 लाख स्वर्ण मुद्राएं: पौराणिक मान्यताओं और ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार, उस समय इस मंदिर को बनाने में करीब 9 लाख रुपये (या स्वर्ण मुद्राएं) की भारी लागत आई थी। यही कारण है कि स्थानीय लोग और देश-विदेश के श्रद्धालु इसे बड़े प्यार से 'नौ लखा मंदिर' (Nau Lakha Mandir) भी कहते हैं।
सोने की मूर्ति की खोज: कहा जाता है कि सन 1657 में संत शूरकिशोरदास जी को इसी पावन स्थान पर माता सीता की एक प्राचीन सुनहरी मूर्ति मिली थी, जिसके बाद इस स्थान की पवित्रता जगजाहिर हुई।
नेपाल के अधिकांश मंदिर जहाँ पारंपरिक पैगोडा शैली (Pagoda Style) में बने हैं, वहीं जानकी मंदिर अपनी वास्तुकला के कारण पूरे नेपाल में सबसे अलग और अनूठा दिखता है:
राजपूत और मुग़ल शैली का मिश्रण: सफेद संगमरमर और पत्थरों से बना यह तीन मंजिला मंदिर पहली नज़र में किसी राजस्थानी या मुग़ल महल जैसा प्रतीत होता है। इसमें हिंदू-कोइरी, राजपूत और मुग़ल स्थापत्य कला का एक अद्भुत मिश्रण देखने को मिलता है।
60 कक्षों का वैभव: लगभग 4,860 वर्ग फीट के विशाल क्षेत्र में फैले इस मंदिर में कुल 60 सुंदर कमरे हैं, जो रंगीन कांच, नक्काशी, सुंदर जालीदार खिड़कियों और झरोखों से सजे हैं। इसकी दीवारों पर उकेरी गई पारंपरिक मिथिला कला (Madhubani/Mithila Painting) इसके सौंदर्य में चार चांद लगा देती है।
मुख्य गर्भगृह: यहाँ माता जानकी और प्रभु श्री राम की अत्यंत मनमोहक स्वर्ण और अष्टधातु की मूर्तियां विराजमान हैं।
विवाह मंडप (Vivah Mandap): मंदिर परिसर के दक्षिण-पश्चिम कोने में एक बेहद सुंदर बगीचे के बीच 'विवाह मंडप' स्थित है। मान्यता है कि यही वह वास्तविक स्थान है जहाँ माता सीता और श्री राम का विवाह (स्वयंवर के बाद) संपन्न हुआ था। यहाँ आज भी विवाह के दृश्य को मूर्तियों के माध्यम से दर्शाया गया है।
जानकी म्यूजियम और पवित्र सरोवर: मंदिर के पास ही 'गंगा सागर' और 'धनुष सागर' नाम के पवित्र तालाब हैं, जहाँ श्रद्धालु स्नान करते हैं।
कैसे पहुँचें: भारत के बिहार राज्य के जयनगर रेलवे स्टेशन से जनकपुर की दूरी मात्र 30 किमी है, जहाँ के लिए अब सीधी ट्रेन और टैक्सियाँ चलती हैं। इसके अलावा नेपाल की राजधानी काठमांडू से आप केवल 25-30 मिनट की डोमेस्टिक फ्लाइट लेकर सीधे जनकपुर एयरपोर्ट पहुँच सकते हैं।
उत्सव का समय: वैसे तो यहाँ साल भर श्रद्धालु आते हैं, लेकिन विवाह पंचमी (नवंबर-दिसंबर) के दौरान यहाँ का नजारा देखने लायक होता है, जब अयोध्या से प्रतीकात्मक रूप से श्री राम की बारात जनकपुर आती है।