सावन (श्रावण) के पवित्र महीने में मध्य प्रदेश की धर्मनगरी उज्जैन में बाबा महाकालेश्वर की दिव्य नगर भ्रमण परंपरा यानी 'महाकाल सवारी' शुरू हो चुकी है। पौराणिक मान्यता है कि सावन के महीने में भगवान महाकाल अपनी प्रजा का हाल-चाल जानने के लिए उज्जैन नगर में भ्रमण पर निकलते हैं।
इस दौरान बाबा महाकाल के मनमहेश, चंद्रमौलेश्वर, शिवतांडव, उमा-महेश और होलकर रूप के दर्शन करने देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु उज्जैन पहुँच रहे हैं। अगर आप भी सावन में बाबा महाकाल के दर्शन और सवारी में शामिल होने की योजना बना रहे हैं, तो जानिए सवारी की सभी तिथियां, समय और रूट।
सावन और भाद्रपद (भादो) महीने में निकलने वाली सभी मुख्य सवारियों की तिथियां इस प्रकार हैं:
| क्रम | सवारी का प्रकार | तिथि |
| 1. | प्रथम सवारी | 3 अगस्त 2026 (सोमवार) |
| 2. | द्वितीय सवारी | 10 अगस्त 2026 (सोमवार) |
| 3. | तृतीय सवारी | 17 अगस्त 2026 (सोमवार) |
| 4. | चतुर्थ सवारी | 24 अगस्त 2026 (सोमवार) |
| 5. | पंचम सवारी | 31 अगस्त 2026 (सोमवार) |
| 6. | शाही सवारी (अंतिम) | 7 सितंबर 2026 (सोमवार) |
सवारी प्रारंभ समय: दोपहर 04:00 बजे (महाकालेश्वर मंदिर के सभा मंडप में पूजन के पश्चात)
रामघाट पर जलाभिषेक: शाम लगभग 05:30 बजे से 06:00 बजे के बीच
मंदिर वापसी: रात लगभग 08:00 बजे तक
पूजन विधि: सवारी निकलने से पहले मंदिर के सभा मंडप में बाबा महाकाल के स्वरूप (पालकी) का विधिवत पूजन और आरती की जाती है। इसके बाद सशस्त्र पुलिस बल द्वारा बाबा महाकाल को गार्ड ऑफ ऑनर (सलामी) दिया जाता है।
पालकी महाकालेश्वर मंदिर से रवाना होकर निम्नलिखित पारंपरिक मार्गों से गुजरती है:
प्रस्थान: महाकाल मंदिर सभा मंडप ➔ गुदरी चौराहा ➔ बख्शी बाजार ➔ कहारवाड़ी
रामघाट (मुख्य पड़ाव): पवित्र क्षिप्रा नदी के तट (रामघाट) पर बाबा की पालकी का क्षिप्रा जल से अभिषेक और पूजन किया जाता है।
वापसी मार्ग: रामघाट से पूजन के पश्चात ➔ रामानुजकोट ➔ मोढ़ की धर्मशाला ➔ कार्तिक चौक ➔ खाती का मंदिर ➔ सत्यनारायण मंदिर ➔ ढाबा रोड ➔ टंकी चौराहा ➔ छत्री चौक ➔ गोपाल मंदिर ➔ पटनी बाजार ➔ गुदरी चौराहा होते हुए पुनः महाकाल मंदिर।
सावन में उज्जैन जाकर बाबा महाकाल की सवारी के दर्शन करना अपने आप में एक आलौकिक और अविस्मरणीय अनुभव है। अगर आप उज्जैन जाने की सोच रहे हैं, तो सुरक्षा और ट्रैफिक पुलिस की गाइडलाइंस का पालन करें और रामघाट या गोपाल मंदिर के पास पहले ही स्थान ग्रहण कर लें।
जय श्री महाकाल! 🚩