सनातन धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व होता है, लेकिन जब यह तिथि मंगलवार के दिन पड़ती है, तो इसे 'भौमवती अमावस्या' के नाम से जाना जाता है। ज्योतिष शास्त्र में 'भौम' का अर्थ मंगल ग्रह से है। साल 2026 में 14 जुलाई, मंगलवार को आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की यह अमावस्या एक बेहद दुर्लभ और शक्तिशाली महासंयोग लेकर आ रही है।
शास्त्रों के अनुसार, भौमवती अमावस्या पर किए गए दान, स्नान, तर्पण और उपाय सामान्य दिनों की तुलना में हजार गुना अधिक फलदायी होते हैं। अगर आपकी कुंडली में पितृ दोष है, राहु-केतु की समस्या है या आप लंबे समय से भारी कर्ज (Debt) के जाल में फंसे हुए हैं, तो कल का दिन आपके लिए वरदान साबित हो सकता है। आइए जानते हैं आज के दिन में क्या खास है और आपको कौन से उपाय जरूर करने चाहिए।
इस अमावस्या को शास्त्रों में "ऋण मोचन अमावस्या" भी कहा गया है। इसके पीछे दो मुख्य कारण हैं:
मंगल देव और हनुमान जी की दोहरी कृपा: मंगलवार का दिन हनुमान जी और मंगल देव दोनों को समर्पित है। अमावस्या की रात को ब्रह्मांडीय ऊर्जाएं बहुत संवेदनशील होती हैं। ऐसे में इस दिन साधना करने से मंगल जनित सभी दोष (जैसे मांगलिक दोष या अंगारक दोष) शांत हो जाते हैं।
पितरों की तृप्ति का महापर्व: अमावस्या के स्वामी पितर देव माने जाते हैं। भौमवती अमावस्या के दिन पितरों के निमित्त किया गया तर्पण उन्हें तुरंत संतुष्ट करता है, जिससे परिवार में चल रही बीमारियां, वंश वृद्धि में रुकावट और अशांति का नाश होता है।
अमावस्या तिथि का प्रारंभ: 13 जुलाई 2026 की रात से ही अमावस्या की ऊर्जाएं सक्रिय हो चुकी हैं।
उदयातिथि और मुख्य पर्व: 14 जुलाई 2026, मंगलवार।
स्नान-दान का सर्वोत्तम समय: 14 जुलाई की सुबह 05:35 बजे से सुबह 08:20 बजे तक।
पितृ तर्पण (कुतप काल) मुहूर्त: दोपहर 11:45 बजे से दोपहर 12:40 बजे के बीच।
भौमवती अमावस्या के दिन पुण्य लाभ कमाने और कष्टों को दूर करने के लिए इन कार्यों को अपने दिनचर्या में जरूर शामिल करें:
पवित्र नदी में स्नान या गंगाजल का प्रयोग: कल सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर किसी पवित्र नदी में स्नान करें। यदि यह संभव न हो, तो घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
पितरों के निमित्त तर्पण और पिंड दान: दोपहर के समय दक्षिण दिशा की ओर मुख करके अपने पितरों को काले तिल, जों और जल से तर्पण दें। उनके नाम से सात्विक भोजन (बिना लहसुन-प्याज का) बनाकर कौवे, गाय और कुत्ते को खिलाएं।
हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ: शाम के समय हनुमान जी के मंदिर जाएं या घर पर ही चमेली के तेल का दीपक जलाकर हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ करें। इससे जीवन के बड़े से बड़े संकट टल जाते हैं।
दीपदान: शाम के समय किसी पीपल के पेड़ के नीचे या घर के मुख्य द्वार पर सरसों के तेल का एक दीपक जरूर जलाएं।
यदि आप आर्थिक तंगी से परेशान हैं या जमीन से जुड़ा कोई विवाद चल रहा है, तो आज ये दो विशेष उपाय जरूर आजमाएं:
1. ऋण मोचन मंगल स्तोत्र का पाठ: सुबह या शाम के समय लाल आसन पर बैठकर 'ऋण मोचन मंगल स्तोत्र' का पाठ करें। मंगल देव के सामने तांबे के लोटे में जल रखकर किया गया यह पाठ कर्ज के बंधनों को बहुत तेजी से काटता है।
2. मसूर की दाल का दान: आज के दिन किसी जरूरतमंद व्यक्ति या सफाई कर्मचारी को लाल रंग की वस्तुएं जैसे साबुत मसूद की दाल, तांबे का बर्तन या लाल कपड़ा दान करें। ऐसा करने से मंगल का अशुभ प्रभाव समाप्त होता है और धन आगमन के नए रास्ते खुलते हैं।
साल में भौमवती अमावस्या का यह संयोग सिर्फ एक या दो बार ही बनता है। यह दिन निराशा को छोड़कर अपने जीवन को एक नई सकारात्मक दिशा देने का है। चाहे पितरों की शांति हो या आर्थिक संकटों से मुक्ति, कल पूरी श्रद्धा के साथ भगवान शिव, हनुमान जी और अपने पितरों का ध्यान करें। जब आपका आंतरिक विश्वास और ग्रहों की अनुकूलता एक साथ मिलती है, तो चमत्कार होने में देर नहीं लगती।