सावन और मानसून का महीना जहां एक तरफ भीषण गर्मी से राहत दिलाता है और चारों ओर हरियाली बिखेरता है, वहीं दूसरी तरफ यह मौसम अपने साथ कई तरह की बीमारियां भी लेकर आता है। इस मौसम में हवा में नमी बढ़ने के कारण बैक्टीरिया और वायरस तेजी से पनपते हैं, जिससे सर्दी, खांसी, फ्लू, मलेरिया और डेंगू जैसी बीमारियों का खतरा दोगुना हो जाता है।
आयुर्वेद में मानसून (वर्षा ऋतु) के दौरान शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) को मजबूत रखने पर विशेष जोर दिया गया है। हमारे ऋषि-मुनियों ने रसोई में मौजूद जड़ी-बूटियों और मसालों की मदद से कुछ ऐसे अद्भुत पेय तैयार किए थे, जिन्हें आज हम 'वैदिक चाय' या 'आयुर्वेदिक काढ़ा' कहते हैं।
आइए जानते हैं ऐसे ही 5 शक्तिशाली और आसानी से बनने वाले घरेलू काढ़ों के बारे में, जो इस मानसून में आपके परिवार को बीमारियों से दूर रखेंगे।
यह सदियों पुराना और सबसे भरोसेमंद नुस्खा है, जो श्वसन तंत्र (Respiratory System) को तुरंत राहत देता है।
सामग्री: 8-10 तुलसी की पत्तियां, 1 इंच अदरक का टुकड़ा, 3-4 पिसी हुई काली मिर्च और थोड़ा सा गुड़ या शहद।
बनाने की विधि: एक गिलास पानी में तुलसी, कुचला हुआ अदरक और काली मिर्च डालकर तब तक उबालें जब तक पानी आधा न रह जाए। छानकर गुनगुना होने पर शहद या गुड़ मिलाकर पिएं।
लाभ: यह फेफड़ों को साफ करता है, छाती में जमे कफ को निकालता है और तुरंत एनर्जी देता है।
गिलोय को आयुर्वेद में 'अमृता' कहा गया है, क्योंकि यह हर तरह के बुखार और इन्फेक्शन को जड़ से खत्म करने की ताकत रखती है।
सामग्री: गिलोय की डंडी (लगभग 6 इंच), 2 लौंग और एक छोटा टुकड़ा दालचीनी।
बनाने की विधि: गिलोय की डंडी को अच्छे से कूट लें। इसे पानी में लौंग और दालचीनी के साथ डालकर धीमी आंच पर उबालें। जब पानी आधा हो जाए, तो इसे छान लें।
लाभ: यह शरीर में प्लेटलेट्स बढ़ाता है, पुराने से पुराने बुखार को ठीक करता है और रक्त को शुद्ध करता है।
हल्दी में पाया जाने वाला 'करक्यूमिन' एक बेहतरीन नेचुरल एंटी-बायोटिक और एंटी-इंफ्लेमेटरी एजेंट है।
सामग्री: आधा छोटा चम्मच कच्ची हल्दी का पेस्ट (या हल्दी पाउडर), एक चुटकी अजवाइन और छोटा टुकड़ा दालचीनी।
बनाने की विधि: पानी में इन तीनों सामग्रियों को डालकर 5-7 मिनट तक अच्छी तरह उबालें और फिर गुनगुना करके चाय की तरह पिएं।
लाभ: यह गले के इन्फेक्शन, खराश और मानसून में होने वाले जोड़ों के दर्द में बहुत आराम देता है।
अगर बारिश में भीगने की वजह से गला बैठ गया है या सूखी खांसी आ रही है, तो यह काढ़ा आपके लिए अमृत समान है।
सामग्री: 1 छोटा चम्मच मुलेठी पाउडर (या मुलेठी की सूखी जड़), आधा चम्मच सौंफ और 2 छोटी इलायची।
बनाने की विधि: पानी में मुलेठी, सौंफ और कुचली हुई इलायची डालकर उबालें। इसे हल्का गर्म ही पिएं।
लाभ: मुलेठी गले को तर रखती है और सौंफ पाचन क्रिया को दुरुस्त रखती है, जिससे मानसून में पेट खराब नहीं होता।
यह काढ़ा शरीर से हानिकारक टॉक्सिन्स (विषाक्त पदार्थों) को बाहर निकालने और सुस्ती दूर करने के लिए बेस्ट है।
सामग्री: फ्रेश लेमनग्रास की पत्तियां, 7-8 पुदीने के पत्ते और आधा नींबू का रस।
बनाने की विधि: लेमनग्रास और पुदीने को पानी में उबाल लें। छानने के बाद ऊपर से आधा नींबू का रस निचोड़ें।
लाभ: यह आपके डाइजेशन को ठीक करता है, मानसून में आने वाली सुस्ती को भगाता है और त्वचा में चमक लाता है।
मात्रा सीमित रखें: आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों की तासीर गर्म होती है, इसलिए दिन में 1 या 2 बार से ज़्यादा (आधा कप प्रत्येक बार) काढ़ा न पिएं।
खाली पेट से बचें: कुछ लोगों को खाली पेट काढ़ा पीने से एसिडिटी हो सकती है, इसलिए इसे नाश्ते के बाद या शाम की चाय की जगह लेना बेहतर है।
शहद का सही नियम: कभी भी उबलते हुए काढ़े में शहद न डालें। काढ़ा जब हल्का गुनगुना हो जाए, तभी शहद मिलाएं, नहीं तो शहद के गुण नष्ट हो जाते हैं।
अंग्रेजी दवाइयां और एंटी-बायोटिक्स खाने से बेहतर है कि हम अपनी रसोई में छिपे इन आयुर्वेदिक खजानों का सही इस्तेमाल करें। यह 'वैदिक चाय' न सिर्फ आपकी इम्युनिटी बढ़ाएगी, बल्कि आपके शरीर को अंदर से मजबूत भी करेगी। इस मानसून अपने परिवार को चाय की जगह ये सेहतमंद काढ़े पिलाएं और खुद को सुरक्षित रखें।