कोकिला व्रत 2022

कोकिला व्रत 2022

महत्वपूर्ण जानकारी

  • कोकिला व्रत 2022
  • बुधवार, 13 जुलाई 23, 2022
  • पूजा मुहूर्त : 07:22 अपराह्न से 09:24 अपराह्न तक
  • पूर्णिमा शुरू - 13 जुलाई 2022 पूर्वाह्न 04:00 बजे
  • पूर्णिमा समाप्त:14 जुलाई 2022 पूर्वाह्न 00:06 बजे

कोकिला व्रत आषाढ़ मास की पूर्णिमा को रखा जाता है। यह व्रत दक्षिण भारत में अधिक प्रचलित है। इस व्रत को करने वाली स्त्रियाँ सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करने के बाद सुगन्धित इत्र का प्रयोग करती हैं। यह नियम से आठ दिन तक करती हैं। प्रातः काल भगवान सूर्य देव की पूजा करने का विधान है।

कोकिला व्रत देवी सती और भगवान शिव को समर्पित है। कोकिल नाम भारतीय पक्षी कोयल के नाम से संदर्भित है और देवी सती से जुड़ा हुआ है। इसको एक कथा के द्वारा समझा जा सकता है।

कथा

एक बार प्रजापति दक्ष ने बहुत बड़ा यज्ञ किया। इस यज्ञ में सब देवताओं को आमंत्रित किया गया था परन्तु अपने दामाद भगवान शिव को उन्होंने आमंत्रित नहीं किया। जब सती को इस बात का पता चला तो उन्होंने अपने पति भगवान शंकर से मायके जाने का इरादा प्रकट किया। शंकर जी ने बिना निमंत्रण वहाँ जाने के लिए मना किया परन्तु जिद्द करके सती मायके चली गई। मायके में पहुँचकर सती का घोर अपमान व अनादर किया गया। इस कारण सती प्रजापति के यज्ञ कुण्ड में कूद कर भस्म हो गई। भगवान शंकर को जब सती के भस्म होने का समाचार मिला तो वे क्रोध में भर गये। भगवान शिव जी ने वीर भद्र को प्रजापति दक्ष को मारने का आदेश दिया। इस विप्लव को शांत करने के लिए भगवान विष्णु ने प्रयास किया। भगवान आशुतोष का क्रोध शान्त हुआ परन्तु आज्ञा का उल्लंधन करने वाली अपनी पत्नी सती को दस हजार वर्ष तक कोकिला पक्षी बनकर विचरण करने का श्राप दे डाला। सती कोकिला रूप में नन्दन वन में दस हजार वर्ष तक रहीं। इसके बाद पार्वती का जन्म पाकर, आषाढ़ मास में नियमित एक मास तक यह व्रत किया जिसके परिणाम स्वरूप भगवान शिव उनको पुनः पति के रूप में प्राप्त हुए।






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