श्री मंगल देव जी की आरती

श्री मंगल देव जी की आरती

सनातन धर्म और वैदिक ज्योतिष में मंगल देव (Bhauma) को साहस, शौर्य और भूमि का स्वामी माना गया है। यदि आपकी कुंडली में मंगल दोष है, जमीन-जायदाद से जुड़े विवाद चल रहे हैं, या आप भारी कर्ज के नीचे दबे हैं, तो प्रत्येक मंगलवार को हनुमान जी की पूजा के बाद श्री मंगल देव जी की आरती का गान अनिवार्य माना जाता है।

इस आरती में मंगल देव के दिव्य स्वरूप (रक्त वस्त्रधारी, गदा और त्रिशूल धारण करने वाले) की स्तुति की गई है। मान्यता है कि जो भी साधक पूरी श्रद्धा के साथ इस आरती को गाता है, स्वामी शिवानंद के अनुसार उसे मानसिक क्लेशों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख, समृद्धि तथा मनवांछित फल की प्राप्ति होती है।

|| श्री मंगल देव जी की आरती ||

ॐ जय मंगल देवा, स्वामी जय मंगल देवा।
मंगलकारी, सुखकारी, हरण सकल क्लेशा॥
(ॐ जय मंगल देवा...)

लोहित वर्ण विराजे, रक्त वस्त्र धारी।
भूमि पुत्र तुम कहलाते, संकट दुखहारी॥
(ॐ जय मंगल देवा...)

गदा और त्रिशूल धारे, मस्तक मुकुट सोहे।
दर्शन से भक्तन के, कोटिक पाप धोवे॥
(ॐ जय मंगल देवा...)

मेष और वृश्चिक राशि के, स्वामी तुम प्यारे।
ऋण मोचक हो जग में, भक्तन के रखवारे॥
(ॐ जय मंगल देवा...)

जो जन मंगलवार को, नित्त तुमको ध्यावे।
मनवांछित फल पावे, संकट कट जावे॥
(ॐ जय मंगल देवा...)

मंगल देव की आरती, जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, सुख-संपत्ति पावे॥
(ॐ जय मंगल देवा...)

|| इति श्री मंगल देव जी आरती सम्पूर्ण ||

आरती के बाद यह प्रार्थना अवश्य करें:

"हे मंगल भगवान! आप भूमिपुत्र, ऋण को समाप्त करके धन देने वाले हैं। कृपा करके मेरे ऋण भार और कष्टों को शीघ्र ही समाप्त करें।"









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