सम्पूर्ण श्री चंद्र स्तोत्रम्

सम्पूर्ण श्री चंद्र स्तोत्रम्

सनातन धर्म और ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को 'मन और माता का कारक' माना गया है। हमारी कुंडली में चंद्रमा की स्थिति यह तय करती है कि हमारा मानसिक स्वास्थ्य और आंतरिक शांति कैसी रहेगी। जब कुंडली में चंद्रमा मजबूत होता है, तो व्यक्ति का मन शांत, एकाग्र और खुशहाल रहता है। इसके विपरीत, यदि चंद्रमा कमजोर या पीड़ित हो, तो इंसान मानसिक तनाव, डिप्रेशन, घबराहट, ओवरथिंकिंग और अनिद्रा (Insomnia) जैसी समस्याओं से घिर जाता है।

यदि आप भी अक्सर मानसिक अशांति या कुंडली में चंद्र दोष (Chandra Dosh) से परेशान हैं, तो ऋषि वेदव्यास द्वारा रचित 'चंद्र स्तोत्र' (Chandra Stotra) का नियमित पाठ आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं है। आइए जानते हैं पूरा चंद्र स्तोत्र, उसका हिंदी अर्थ, सही पाठ विधि और इससे मिलने वाले चमत्कारी ज्योतिषीय लाभ।

📜 सम्पूर्ण श्री चंद्र स्तोत्रम् (Lyrics with Meaning)

यहाँ चंद्र देव की स्तुति के लिए पूरा और प्रामाणिक स्तोत्र दिया गया है। आप रोज़ पाठ करते समय इसके अर्थ को भी मन में दोहरा सकते हैं:

ॐ श्वेताम्बरः श्वेतवपुः। किरीटी श्वेतधुतिर्दण्डधरोद्विबाहुः।
चन्द्रोऽमृतात्मा वरदः शशाङ्कः श्रेयांसि महं प्रददातु देवः ॥ १ ॥

अर्थ: सफेद वस्त्र धारण करने वाले, श्वेत शरीर वाले, मुकुट से सुशोभित, सफेद कांति वाले, हाथ में गदा धारण करने वाले, दो भुजाओं वाले, अमृतस्वरूप, वरदान देने वाले और खरगोश के चिह्न से युक्त चंद्रदेव मुझे कल्याण और समृद्धि प्रदान करें।

दधिशङ्कतुषाराभं क्षीरोदार्णवसम्भवम्।
नमामि शशिनं सोमं शम्भोर्मुकुटभूषणम् ॥ २ ॥

अर्थ: जो दही, शंख और बर्फ के समान उज्ज्वल हैं, जिनकी उत्पत्ति क्षीर सागर से हुई है, जो भगवान शिव के मस्तक के सुंदर आभूषण हैं, उन चंद्रमा (सोम) को मैं बारंबार नमन करता हूँ।

क्षीरसिन्धुसमुत्पन्नो रोहिणीसहितः प्रभुः।
हरस्य मुकुटावास बालचन्द्र नमोस्तु ते ॥ ३ ॥

अर्थ: क्षीर सागर से उत्पन्न होने वाले, अपनी प्रिय पत्नी रोहिणी के साथ सुशोभित होने वाले, भगवान शिव के मुकुट पर निवास करने वाले हे बालचंद्र! आपको मेरा सादर नमस्कार है।

सुधामया यत्किरणाः पोषयन्त्योषधीवनम्।
सर्वान्नरसहेतुंतं नमामि सिन्धुनन्दनम् ॥ ४ ॥

अर्थ: जिनकी अमृतमयी किरणें सभी औषधियों और वनस्पतियों का पोषण करती हैं, जो संसार के समस्त अन्न और रसों के मूल कारण हैं, उन समुद्र-पुत्र चंद्रदेव को मैं प्रणाम करता हूँ।

राकेशं तारकेशं च रोहिणी प्रियसुन्दरम्।
ध्यायतां सर्वदोषघ्नं नमामीन्दुं मुहुर्मुहुः ॥ ५ ॥

अर्थ: जो पूर्णिमा के स्वामी हैं, तारों के राजा हैं और रोहिणी के अत्यंत प्रिय व सुंदर पति हैं; जिनका ध्यान करने मात्र से कुंडली के सभी दोष नष्ट हो जाते हैं, उन चंद्रदेव (इन्दु) को मैं बार-बार नमस्कार करता हूँ।

।। इति श्री चंद्र स्तोत्रं सम्पूर्णम् ।।

🪔 चंद्र स्तोत्र के चमत्कारी ज्योतिषीय फायदे (Chandra Stotra Benefits)

नियमित रूप से इस स्तोत्र का पाठ करने से जीवन में कई सकारात्मक बदलाव देखने को मिलते हैं:

  1. मानसिक तनाव और डिप्रेशन से मुक्ति: चूंकि चंद्रमा मन का स्वामी है, इसलिए इसका पाठ करने से चंचल और अशांत मन को स्थिरता मिलती है। जो लोग बेवजह के डर या ओवरथिंकिंग से जूझ रहे हैं, उन्हें इससे गहरा सुकून मिलता है।

  2. कुंडली में चंद्र दोष का निवारण: यदि आपकी कुंडली में चंद्रमा राहु-केतु के साथ बैठकर 'ग्रहण दोष' बना रहा है, या सूर्य के अत्यधिक निकट होकर 'अस्त' है, तो इसके पाठ से अशुभ प्रभाव धीरे-धीरे समाप्त हो जाता है।

  3. माता के साथ संबंधों में सुधार: ज्योतिष में चंद्रमा का सीधा संबंध माता से होता है। जिन जातकों का अपनी माता के साथ वैचारिक मतभेद रहता है या जिनकी माता का स्वास्थ्य अक्सर खराब रहता है, उनके लिए यह पाठ अचूक है।

  4. एकाग्रता (Focus) में वृद्धि: छात्रों और कामकाजी लोगों के लिए यह स्तोत्र बहुत फायदेमंद है। यह मानसिक भटकाव को रोककर फोकस बढ़ाता है, जिससे सही निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है।

  5. अनिद्रा से राहत: यदि आपको रात में बुरे सपने आते हैं या नींद न आने की बीमारी है, तो रात को सोने से पहले इसका पाठ करने से गहरी व सुकून भरी नींद आती है।

🛠️ चंद्र स्तोत्र की सही पाठ विधि

  • सबसे उत्तम दिन: वैसे तो इसका पाठ रोज किया जा सकता है, लेकिन सोमवार (Monday) और पूर्णिमा (Full Moon Day) के दिन इसका पाठ करना सबसे ज्यादा फलदायी माना जाता है।

  • समय: सुबह स्नान के बाद या फिर शाम को चंद्रमा के उदय होने के बाद इसका पाठ करना सर्वोत्तम है।

  • दिशा व आसन: सफेद रंग के आसन पर बैठकर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।

  • पूजा प्रक्रिया: सामने भगवान शिव या चंद्र देव की तस्वीर स्थापित करें। एक घी का दीपक जलाएं और पूरी श्रद्धा के साथ इस स्तोत्र का 1, 3 या 11 बार पाठ करें।

  • अर्घ्य देना: पाठ पूरा होने के बाद तांबे या चांदी के लोटे में जल, थोड़ा सा दूध और सफेद फूल मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य (जल अर्पित) देना अत्यंत शुभ माना जाता है।

अंत में 

आज की इस भागदौड़ भरी जिंदगी में हर दूसरा इंसान मानसिक तनाव से परेशान है। हमारे शास्त्रों में छिपे ये स्तोत्र कमाल की हीलिंग पावर (Healing Power) रखते हैं। अगर आप बहुत व्यस्त भी रहते हैं, तो हर सोमवार को सिर्फ 5 मिनट निकालकर इसका पाठ शुरू करके देखिए। आपका मन अंदर से शांत होने लगेगा और जब मन शांत होगा, तो जीवन के सारे काम अपने आप सही दिशा में चलने लगेंगे!

।। ॐ सों सोमाय नमः ।।









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