आमलकी एकादशी 2026: आज आंवले के पेड़ की पूजा से मिलता है अक्षय पुण्य; जानें शुभ मुहूर्त और महत्व

नई दिल्ली/मथुरा: फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को आमलकी एकादशी के रूप में मनाया जाता है। शास्त्रों के अनुसार, जब भगवान विष्णु ने सृष्टि की रचना के लिए ब्रह्मा जी को उत्पन्न किया, उसी समय 'आंवले' के वृक्ष की भी उत्पत्ति हुई थी। इसीलिए आंवले के वृक्ष को आदि वृक्ष माना जाता है और इसके हर हिस्से में देवताओं का वास होता है।

1. आमलकी एकादशी 2026: शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि का विवरण इस प्रकार है:

  • एकादशी तिथि प्रारंभ: 26 फरवरी 2026 को रात 11:20 बजे से।

  • एकादशी तिथि समाप्त: 27 फरवरी 2026 को रात 12:45 बजे तक।

  • पारण (व्रत तोड़ने) का समय: 28 फरवरी 2026 को सुबह 06:45 से 09:00 बजे के बीच।

2. आंवले के पेड़ की पूजा क्यों है खास?

मान्यता है कि आंवले के वृक्ष के मूल (जड़) में भगवान विष्णु, तने में शिव, शाखाओं में ऋषि-मुनि, पत्तों में देवता और फलों में प्रजापति का वास होता है। आज के दिन आंवले की पूजा करने से:

  • अक्षय पुण्य: भक्तों को जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति मिलती है और समस्त पापों का नाश होता है।

  • आरोग्य की प्राप्ति: आयुर्वेद और शास्त्रों दोनों में आंवले को 'अमृत' माना गया है, इसकी पूजा से स्वास्थ्य लाभ मिलता है।

3. आज की पूजा विधि

  • सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु का ध्यान करें और व्रत का संकल्प लें।

  • यदि संभव हो, तो किसी आंवले के वृक्ष के पास जाकर उसकी सफाई करें।

  • वृक्ष की जड़ में जल अर्पित करें और धूप-दीप जलाएं।

  • आंवले के वृक्ष पर रोली, अक्षत और फूल चढ़ाएं और 7 या 11 बार परिक्रमा करें।

  • आज के दिन आंवले का दान करना और स्वयं भी आंवला खाना अत्यंत शुभ माना जाता है।

4. रंगभरनी एकादशी का संयोग

आज ही के दिन काशी और ब्रज में रंगभरनी एकादशी मनाई जा रही है। वाराणसी में बाबा विश्वनाथ का 'गौना' उत्सव मनाया जाता है, वहीं वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में आज से रंग-गुलाल की होली का विधिवत शुभारंभ हो जाता है।


प्रश्न और उत्तर


आप इन्हें भी पढ़ सकते हैं


2026 के आगामी त्यौहार और व्रत











दिव्य समाचार












ENहिं