जैसे-जैसे सूरज की तपिश बढ़ रही है, आधुनिक कोल्ड-ड्रिंक्स या फ्रिज के अत्यधिक ठंडे पानी की ओर भागने के बजाय, हमारी वैदिक जीवनशैली और आयुर्वेद की ओर मुड़ना सबसे समझदारी भरा निर्णय है। आयुर्वेद के अनुसार, गर्मियों में शरीर में 'पित्त दोष' बढ़ जाता है। इसे संतुलित रखने और शरीर को प्राकृतिक रूप से ठंडा रखने के लिए हमारे पूर्वजों ने तीन अद्भुत पारंपरिक पेयों का विधान किया है।
ये पेय न केवल आपके शरीर का तापमान नियंत्रित रखते हैं, बल्कि आपकी पाचन अग्नि (जठराग्नि) को भी दुरुस्त करते हैं:
आयुर्वेद में बेल (Bilva) को पेट के लिए सबसे उत्तम औषधि माना गया है। भगवान शिव को प्रिय यह फल गर्मियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।
गुण: यह फाइबर से भरपूर होता है और शरीर की आंतरिक गर्मी को तुरंत शांत करता है। यह लू (Heatstroke) से बचाने में अचूक है।
बनाने की विधि: बेल के पके हुए गूदे को पानी में मैश करके छान लें। इसमें थोड़ा भुना हुआ जीरा, काला नमक और स्वादानुसार मिश्री (Refined Sugar की जगह धागे वाली मिश्री का प्रयोग करें) मिलाएं।
दोपहर के भोजन के बाद छाछ का सेवन करना आयुर्वेद में 'अमृत' के समान माना गया है। सादा पानी पीने के बजाय मसालेदार मट्ठा शरीर को तुरंत हाइड्रेट करता है।
गुण: यह पेट को ठंडा रखता है, पित्त को शांत करता है और गर्मियों में होने वाली बदहजमी को दूर करता है।
बनाने की विधि: ताजे दही को मथकर मक्खन निकाल लें (या पतली छाछ लें)। इसमें पिसा हुआ पुदीना, हरी धनिया, भुना जीरा, हींग और सेंधा नमक मिलाएं। मिट्टी के कुल्हड़ में इसका सेवन करने से इसका औषधीय गुण दोगुना हो जाता है।
आयुर्वेद में चंदन (Chandan) और खस (Vetiver) को परम शीतल (Cooling agents) माना गया है। इनका उपयोग प्राचीन काल से राजा-महाराजाओं के महलों में गर्मियों से बचने के लिए किया जाता था।
गुण: यह पेय न केवल शरीर को ठंडा करता है, बल्कि अत्यधिक पसीने और घबराहट की समस्या से भी राहत देता है। यह मन को शांत कर मानसिक स्पष्टता बढ़ाता है।
बनाने की विधि: खस की जड़ों या शुद्ध चंदन के अर्क को पानी में उबालकर, उसमें मिश्री मिलाकर सिरप तैयार किया जाता है। इसे ठंडे पानी या मिट्टी के घड़े के पानी में मिलाकर पिया जाता है।
आयुर्वेद के अनुसार, गर्मियों में बहुत अधिक बर्फ या अत्यधिक ठंडे (Refrigerated) पेयों से बचना चाहिए, क्योंकि यह हमारी पाचन क्रिया को धीमा कर देते हैं। इसकी जगह हमेशा मिट्टी के घड़े के पानी का उपयोग करें, जो पानी के pH स्तर को संतुलित रखता है और प्राकृतिक शीतलता देता है।