गुजरात की संस्कृति और परंपराओं में गौरी व्रत (Gauri Vrat) का विशेष स्थान है। मुख्य रूप से आषाढ़ मास में मनाया जाने वाला यह 5 दिवसीय व्रत माता पार्वती को समर्पित होता है। गुजरात में इसे 'मोड़ाकत व्रत' (Morakat Vrat) के नाम से भी जाना जाता है।
यह पावन व्रत मुख्य रूप से कुंवारी बालिकाओं और कन्याओं द्वारा सुयोग्य, संस्कारी और दीर्घायु पति की प्राप्ति के लिए रखा जाता है। यह व्रत आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी से शुरू होकर आषाढ़ पूर्णिमा (गुरु पूर्णिमा) के दिन समाप्त होता है।
आइए जानते हैं साल 2026 में गौरी व्रत की सही तिथियां, इसके कठोर नियम और धार्मिक महत्व।
पंचांग गणना के अनुसार साल 2026 में गौरी व्रत की तिथियां इस प्रकार हैं:
गौरी व्रत प्रारंभ तिथि: 25 जुलाई 2026 (शनिवार) - आषाढ़ शुक्ल एकादशी
एकादशी तिथि प्रारंभ: 24 जुलाई 2026 को सुबह 09:12 बजे से
एकादशी तिथि समाप्त: 25 जुलाई 2026 को सुबह 11:34 बजे तक
जयपार्वती व्रत तारीख: 27 जुलाई 2026 (सोमवार)
गौरी व्रत समाप्त (पारण तिथि): 29 जुलाई 2026 (बुधवार) - गुरु पूर्णिमा
अलोना (बिना नमक का) भोजन: 'मोड़ाकत' शब्द का अर्थ बिना नमक का खाना होता है। इस व्रत के दौरान 5 दिनों तक कन्याएं नमक का त्याग करती हैं और सात्विक व फीका भोजन ही ग्रहण करती हैं।
जवारा बोना (Jawara Cultivation): व्रत के पहले दिन छोटी-छोटी मटकी या पात्रों में मिट्टी भरकर गेहूं/जौ बोए जाते हैं, जिन्हें 'जवारा' कहा जाता है।
5 दिनों तक सेवा: 5 दिनों तक इन जवारों की नियमित पूजा की जाती है, जल चढ़ाया जाता है और रुद्राक्ष व कुमकुम की माला से माता गौरी का ध्यान किया जाता है।
जवारा विसर्जन: 5वें दिन गुरु पूर्णिमा की शाम को पूजा-अर्चना के बाद इन जवारों को किसी पवित्र नदी या जलाशय में विसर्जित कर दिया जाता है।
सुबह का संकल्प: 25 जुलाई की सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें। इसके बाद माता पार्वती और भगवान शिव का ध्यान करते हुए 5 दिनों के गौरी व्रत का संकल्प लें।
जवारा पूजन: एक छोटे गमले में मिट्टी रखकर उसमें गेहूं के बीज बोएं। उसके पास देवी गौरी और शिव जी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
श्रृंगार व अर्पण: माता गौरी को रोली, अक्षत, सिंदूर, फल और फूल अर्पित करें। गौरी जी पर कॉटन के धागे (नागला) चढ़ाए जाते हैं।
आरती व कथा: प्रतिदिन सुबह-शाम गौरी व्रत की कथा सुनें या पढ़ें और आरती करें।
जागरण व पारण: अंतिम दिन (29 जुलाई को) कई कन्याएं रातभर जागरण करती हैं और अगले दिन पारण करके नमक युक्त भोजन ग्रहण करती हैं।
गुजरात का यह गौरी व्रत (मोड़ाकत व्रत) अनुशासन, भक्ति और समर्पण की अनूठी मिसाल है। बिना नमक का खाना खाकर 5 दिनों तक माता पार्वती की तपस्या करना कन्याओं के अटूट विश्वास को दर्शाता है। अगर आपके घर में भी बेटियां यह व्रत रख रही हैं, तो माता गौरी उनके सुखी और उज्ज्वल भविष्य की हर मनोकामना पूरी करें!