हिंदू धर्म शास्त्रों में कुछ ऐसे विशेष दिनों का वर्णन मिलता है, जिन्हें संपूर्ण रूप से 'अबूझ मुहूर्त' (स्वयं सिद्ध मुहूर्त) माना जाता है। इसका अर्थ यह है कि इस दिन कोई भी शुभ या मांगलिक कार्य करने के लिए किसी पंडित से मुहूर्त निकलवाने या पंचांग देखने की आवश्यकता नहीं होती। आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को पड़ने वाली भड़ली नवमी (Bhadli Navami) ऐसा ही एक अत्यंत शुभ और पवित्र दिन है।
भड़ली नवमी को अक्षय नवमी और कंदर्प नवमी के नाम से भी जाना जाता है। इसके ठीक दो दिन बाद देवशयनी एकादशी आती है, जिससे भगवान विष्णु चार महीनों के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं और सभी मांगलिक कार्यों पर ब्रेक लग जाता है। इसलिए सावन और चातुर्मास से ठीक पहले भड़ली नवमी शादी-विवाह और शुभ कार्यों का आखिरी सबसे बड़ा दिन होता है।
हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल भड़ली नवमी तिथि की शुरुआत और शुभ समय की तिथियां इस प्रकार हैं:
(चूंकि पूरा दिन ही अबूझ मुहूर्त है, इसलिए पूरे दिन में कभी भी मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं।)
शास्त्रों के अनुसार, जिस तरह वैशाख महीने में 'अक्षय तृतीया' का दिन अबूझ मुहूर्त होता है, ठीक उसी प्रकार आषाढ़ महीने में 'भड़ली नवमी' का दिन सिद्ध माना गया है।
शादी-विवाह का अंतिम मुहूर्त: जिन लोगों के विवाह के लिए पूरे साल कोई शुभ साया या लग्न नहीं मिल पाता, उनका विवाह भड़ली नवमी के दिन बिना किसी हिचकिचाहट के संपन्न कराया जा सकता है।
मांगलिक कार्यों की झड़ी: इस दिन नया घर खरीदना, गृह प्रवेश, सगाई, नया बिजनेस शुरू करना, गाड़ी खरीदना या मुंडन संस्कार करना बेहद शुभ और फलदायी माना जाता है।
भगवान विष्णु और गुप्त नवरात्रि: भड़ली नवमी के दिन आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का समापन भी होता है। इस दिन माता दुर्गा और भगवान विष्णु दोनों की पूजा करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
प्रातः स्नान और संकल्प: भड़ली नवमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। संभव हो तो पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर स्नान करें और पीले या लाल वस्त्र पहनें।
भगवान विष्णु और लक्ष्मी पूजन: घर के मंदिर में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। उन्हें रोली, चंदन, हल्दी और पीले फूल अर्पित करें।
तुलसी दल और भोग: श्री हरि विष्णु को तुलसी के पत्ते (तुलसी दल) और पीले फल या मिठाई का भोग लगाएं।
मंत्र जाप: 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
दान-पुण्य का महत्व: इस दिन जल, छाता, पंखा, तिल, वस्त्र और अनाज का दान करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है और पितृ दोष शांत होता है।
अगर आपके घर में या किसी रिश्तेदारी में कोई शुभ काम रुका हुआ है या शादी के लिए मुहूर्त नहीं निकल पा रहा है, तो भड़ली नवमी का दिन महादेव और श्री हरि विष्णु की कृपा से एकदम परफेक्ट है। चातुर्मास शुरू होने से पहले यह भगवान का दिया हुआ एक सुंदर वरदान है।