नई दिल्ली/हरिद्वार, 17 फरवरी 2026: हिंदू पंचांग में अमावस्या की तिथि का विशेष महत्व है। इसे अक्सर पितरों की पूजा और दान-पुण्य के लिए जाना जाता है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि अमावस्या का सीधा संबंध भगवान शिव से भी है। आज फाल्गुन अमावस्या के पावन अवसर पर, आइए जानते हैं कि क्यों इस दिन महादेव की आराधना करने से जीवन की बड़ी से बड़ी बाधाएं दूर हो जाती हैं।
पुराणों के अनुसार, भगवान शिव ने चंद्रमा को अपने मस्तक पर धारण किया है। चंद्रमा मन का कारक है और अमावस्या के दिन चंद्रमा अदृश्य होता है, जिससे मन अक्सर विचलित, अशांत या भारी महसूस कर सकता है। जब हम अमावस्या के दिन 'चंद्रशेखर' (शिव) की पूजा करते हैं, तो वे हमारे मन को स्थिरता प्रदान करते हैं और मानसिक कष्टों का अंत करते हैं।
अमावस्या सबसे अंधेरी रात होती है। महादेव 'तमसो मा ज्योतिर्गमय' के प्रतीक हैं—जो हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाते हैं। शिव की पूजा इस दिन यह संदेश देती है कि चाहे जीवन में कितना भी गहरा अंधेरा (कष्ट) क्यों न हो, महादेव की भक्ति की एक किरण उसे मिटाने के लिए पर्याप्त है।
अमावस्या पितरों की तिथि है। शास्त्र कहते हैं कि यदि किसी की कुंडली में पितृ दोष हो, तो महादेव की शरण में जाने से शांति मिलती है। शिव ही एकमात्र ऐसे देवता हैं जिन्हें 'महाकाल' कहा जाता है, जो जीवन और मृत्यु के चक्र को नियंत्रित करते हैं। आज के दिन शिवलिंग पर जल और बेलपत्र अर्पित करने से पितृ तृप्त होते हैं और वंश को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।
जिन जातकों पर शनि की साढ़ेसाती या कालसर्प दोष का प्रभाव होता है, उनके लिए अमावस्या पर शिव उपासना रामबाण मानी जाती है। विशेषकर अमावस्या के दिन शिव तांडव स्तोत्र या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से ग्रहों की प्रतिकूलता समाप्त होती है।
अभिषेक: शिवलिंग पर गंगाजल और कच्चे दूध से अभिषेक करें।
दीपदान: आज शाम को पीपल के वृक्ष के नीचे और शिवालय में दीप प्रज्वलित करें।
दान: इस दिन काले तिल और अन्न का दान करने से महादेव और पितृ दोनों प्रसन्न होते हैं।