नई दिल्ली, 12 फरवरी 2026: फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को 'विजया एकादशी' के नाम से जाना जाता है। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, यह एकादशी अपने भक्तों को कठिन से कठिन परिस्थितियों में विजय दिलाने वाली मानी गई है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, स्वयं श्री राम ने लंका पर विजय प्राप्त करने के लिए समुद्र तट पर इस व्रत का पालन किया था।
एकादशी तिथि प्रारंभ: 12 फरवरी 2026 की रात से।
एकादशी व्रत तिथि: 13 फरवरी 2026 (शुक्रवार)।
पारण (व्रत खोलने) का समय: 14 फरवरी की सुबह।
शास्त्रों में विजया एकादशी को बहुत प्रभावशाली बताया गया है। यह व्रत व्यक्ति के भीतर आत्मविश्वास का संचार करता है और उसे शत्रुओं पर मानसिक व आध्यात्मिक विजय प्रदान करता है। जो लोग जीवन में बार-बार असफल हो रहे हैं या कानूनी विवादों में फंसे हैं, उनके लिए यह व्रत विशेष फलदायी माना जाता है।
स्नान और संकल्प: सुबह जल्दी उठकर पवित्र नदी या घर पर गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
कलश स्थापना: एक वेदी बनाकर उस पर सात धान्य (सप्तधान्य) रखें और सोने, चांदी, तांबे या मिट्टी का कलश स्थापित करें।
भगवान विष्णु की पूजा: भगवान विष्णु (श्री हरि) की प्रतिमा को कलश पर स्थापित कर धूप, दीप, पुष्प और नैवेद्य से पूजन करें।
व्रत कथा और जागरण: दिनभर व्रत रखें, एकादशी की कथा सुनें और रात्रि में जागरण कर विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।