

मथुरा/वृंदावन, 4 जनवरी 2026: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने विश्व प्रसिद्ध ठाकुर बांके बिहारी मंदिर के कायाकल्प की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। लंबे समय से प्रतीक्षित 'बांके बिहारी मंदिर कॉरिडोर' परियोजना ने अब धरातल पर गति पकड़ ली है। आज प्रशासन की एक उच्च स्तरीय विशेष टीम ने मंदिर के आसपास के क्षेत्रों का विस्तृत 'डिजिटल मैपिंग' सर्वेक्षण शुरू कर दिया है।
वृंदावन की कुंज गलियां अपनी संकीर्णता और ऐतिहासिकता के लिए जानी जाती हैं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में श्रद्धालुओं की संख्या में बेतहाशा वृद्धि हुई है। त्योहारों और सप्ताहांत (Weekends) पर यहां भारी भीड़ के कारण भगदड़ जैसी स्थिति पैदा होने का खतरा बना रहता है। इस समस्या के स्थाई समाधान के लिए वाराणसी के काशी विश्वनाथ धाम की तर्ज पर बांके बिहारी कॉरिडोर की रूपरेखा तैयार की गई है।
डिजिटल मैपिंग: आधुनिक मशीनों के जरिए गलियों की चौड़ाई, भवनों की स्थिति और मंदिर की दूरी का सटीक डेटा जुटाया जा रहा है।
सुगम प्रवेश और निकास: कॉरिडोर बनने के बाद भक्तों को मंदिर में प्रवेश करने और दर्शन के बाद बाहर निकलने के लिए पर्याप्त जगह मिलेगी, जिससे भीड़ का दबाव कम होगा।
आधुनिक सुविधाएं: कॉरिडोर में तीर्थयात्रियों के लिए विश्राम कक्ष, शुद्ध पेयजल, चिकित्सा केंद्र और क्लॉक रूम जैसी विश्वस्तरीय सुविधाएं जोड़ी जाएंगी।
प्राचीनता का संरक्षण: स्थानीय प्रशासन और सर्वे टीम ने आश्वासन दिया है कि विकास के दौरान वृंदावन की प्राचीन 'कुंज गलियों' के मूल स्वरूप और उनकी ऐतिहासिक विरासत के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
प्रशासन के इस कदम से जहां श्रद्धालुओं में खुशी की लहर है कि अब उन्हें घंटों लंबी और तंग कतारों में नहीं फंसना होगा, वहीं स्थानीय निवासियों और व्यापारियों को भी उम्मीद है कि सुव्यवस्थित कॉरिडोर से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
निष्कर्ष: बांके बिहारी कॉरिडोर न केवल वृंदावन के धार्मिक पर्यटन को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगा, बल्कि यह भक्तों की सुरक्षा और श्रद्धा के सम्मान का भी एक बड़ा माध्यम बनेगा। सर्वेक्षण का कार्य पूरा होने के बाद जल्द ही निर्माण की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है।