ज्येष्ठ मास की तपती गर्मी में बिना पानी की एक बूंद ग्रहण किए निर्जला एकादशी का कठिन व्रत रखना अपने आप में एक बहुत बड़ी तपस्या है। आज, 25 जून 2026 को देश भर में लाखों श्रद्धालु इस पावन व्रत को पूरे नियम और निष्ठा के साथ कर रहे हैं। लेकिन शास्त्रों के अनुसार, किसी भी व्रत का पूर्ण फल तभी मिलता है जब उसका पारण (Fast Breaking) सही समय और सही विधि से किया जाए।
यदि पारण में कोई गलती हो जाए या उसे गलत समय पर खोला जाए, तो व्रत खंडित माना जाता है और दोष लगता है। आइए, 'द डिवाइन इंडिया' के इस विशेष लेख में जानते हैं कि कल यानी 26 जून 2026 को निर्जला एकादशी व्रत खोलने का सही समय क्या है और व्रत खोलते समय किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
पंचांग के अनुसार, एकादशी व्रत हमेशा द्वादशी तिथि के भीतर और हरि वासर (Hari Vasar) समाप्त होने के बाद ही खोला जाता है।
पारण की सही तारीख: 26 जून 2026 (शुक्रवार)
पारण का शुभ समय: सुबह 05:35 बजे से सुबह 08:20 बजे के बीच
द्वादशी तिथि समाप्त होने का समय: 26 जून 2026 को रात 10:21 बजे तक।
⚠️ ध्यान दें (हरि वासर नियम): द्वादशी तिथि की पहली एक-चौथाई अवधि को 'हरि वासर' कहा जाता है, जिसमें व्रत खोलना सख्त वर्जित होता है। कल सुबह सूर्योदय के समय हरि वासर समाप्त हो चुका होगा, इसलिए आप सुबह 05:35 बजे के बाद कभी भी अपना व्रत खोल सकते हैं।
चूंकि आपने पूरे 24 घंटे से अधिक समय तक पानी नहीं पिया है, इसलिए पारण करने की एक खास धार्मिक और वैज्ञानिक विधि है:
सुबह का स्नान और पूजा: कल सुबह (26 जून) सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के सामने घी का दीपक जलाएं।
कलश का दान: व्रत खोलने से पहले किसी ब्राह्मण, मंदिर या जरूरतमंद व्यक्ति को पानी से भरा मिट्टी का घड़ा (कलश), खरबूजा, आम या हाथ का पंखा और कुछ दक्षिणा दान करें (यदि आपने आज यह दान नहीं किया है)।
तुलसी दल और चरणामृत: भगवान विष्णु को अर्पित किए गए चरणामृत और तुलसी पत्र (तुलसी के पत्ते) को मुंह में डालकर सबसे पहले अपना व्रत खोलें।
24 घंटे से अधिक समय तक निर्जल (बिना पानी के) रहने के बाद शरीर का पाचन तंत्र बेहद संवेदनशील हो जाता है। इसलिए इन बातों का ध्यान रखें:
अचानक बहुत सारा पानी न पीएं: व्रत खोलते समय सबसे पहले एक या दो घूंट हल्का गुनगुना पानी या नींबू-पानी पीएं। अचानक एक साथ ढेर सारा ठंडा पानी पीने से पेट में मरोड़ या तबियत खराब हो सकती है।
भारी या तला-भुना खाना न खाएं: व्रत खोलते ही तुरंत पूरी, पराठे या अत्यधिक मसालेदार भोजन न खाएं। सबसे पहले कोई रसीला फल (जैसे खरबूजा या तरबूज) खाएं या हल्की मूंग की दाल की खिचड़ी का सेवन करें।
लहसुन-प्याज से दूरी: द्वादशी के दिन भी बनने वाला भोजन सात्विक होना चाहिए। इस दिन भी घर में लहसुन, प्याज या तामसिक भोजन नहीं बनना चाहिए।