नई दिल्ली: हिंदू धर्म में भगवान चित्रगुप्त को विशेष स्थान प्राप्त है। माना जाता है कि हमारी मृत्यु के पश्चात यमराज के दरबार में हमारे कर्मों का जो हिसाब-किताब पेश किया जाता है, उसे लिखने वाले भगवान चित्रगुप्त ही हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि उनकी पूजा केवल कायस्थ समाज तक सीमित नहीं है, बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए अनिवार्य है जो अपने भाग्य को संवारना चाहता है?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की और यमराज को जीवों के कर्मों का लेखा-जोखा रखने का काम सौंपा, तो यमराज ने अकेले इस काम को करने में असमर्थता जताई। तब ब्रह्मा जी 11,000 वर्षों तक ध्यान मग्न रहे और उनकी काया (शरीर) से एक दिव्य पुरुष उत्पन्न हुआ, जिसे 'चित्रगुप्त' कहा गया। चूंकि वे ब्रह्मा की 'काया' से उत्पन्न हुए, इसलिए उनके वंशज 'कायस्थ' कहलाए।
ज्यादातर लोग चित्रगुप्त पूजा को केवल दिवाली के बाद 'यम द्वितीया' से जोड़कर देखते हैं, लेकिन इसके पीछे के आध्यात्मिक रहस्य बहुत गहरे हैं:
भाग्य बदलने की शक्ति: माना जाता है कि चित्रगुप्त जी के पास केवल 'कलम' नहीं है, बल्कि वे मनुष्य के मन के 'चित्रों' (गुप्त विचारों) को भी पढ़ सकते हैं। उनकी साधना से व्यक्ति के बुरे कर्मों का प्रभाव कम होता है और सदबुद्धि प्राप्त होती है।
कलम और दवात की पूजा: इस पूजा में पेन और डायरी की पूजा की जाती है। यह इस बात का प्रतीक है कि हम अपने जीवन के 'लेखक' स्वयं हैं। यदि हम सच्चाई और ईमानदारी से अपने कर्म लिखेंगे, तो चित्रगुप्त जी हमारे भाग्य की रेखाएं बदल सकते हैं।
भगवान चित्रगुप्त की आरती में वो शक्ति है जो व्यक्ति के भीतर आत्म-निरीक्षण (Self-introspection) का भाव जगाती है। जब भक्त सच्चे मन से उनकी आरती करता है, तो उसे अहसास होता है कि उसका हर एक काम देखा जा रहा है।
मंत्र का प्रभाव: 'मसिभाजनसंयुक्तं ध्येयंच साक्षरं च माम्' — यह मंत्र ज्ञान और न्याय की प्राप्ति के लिए अचूक माना जाता है।
एक सफेद कागज पर 'श्री गणेशाय नमः' और 'ओम चित्रगुप्ताय नमः' लिखकर अपनी आय-व्यय या अपनी गलतियों की क्षमा मांगते हुए चित्रगुप्त जी के चरणों में अर्पित करें।
कलम (Pen) का दान करें। माना जाता है कि शिक्षा के प्रसार में मदद करने से भगवान चित्रगुप्त अत्यंत प्रसन्न होते हैं।
भगवान चित्रगुप्त की पूजा हमें यह सिखाती है कि हम ईश्वर की नज़र से बच नहीं सकते। यदि हम अपने वर्तमान कर्मों को सुधार लें, तो भविष्य का भाग्य अपने आप संवर जाएगा।