नई दिल्ली/हरिद्वार: सनातन धर्म में शनिवार का दिन न्याय के देवता शनि देव को समर्पित है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शनि देव कर्मों के आधार पर फल देते हैं। यदि आपकी कुंडली में शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या या कोई अन्य दोष है, तो आज के दिन किए गए कुछ विशेष उपाय न केवल कष्टों को कम करते हैं, बल्कि भाग्य के बंद दरवाजे भी खोल देते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष में साक्षात भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का वास होता है। पौराणिक कथा के अनुसार, महर्षि पिप्पलाद ने पीपल के नीचे ही तपस्या कर शनि देव को परास्त किया था, जिसके बाद शनि देव ने वरदान दिया था कि जो भी शनिवार को पीपल की पूजा करेगा, उसे शनि कष्ट नहीं देंगे।
दीपक जलाने के नियम:
तेल: हमेशा सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
समय: सूर्यास्त के बाद (शाम 5 से 7 के बीच) दीपक जलाना सबसे शुभ होता है।
परिक्रमा: दीपक जलाने के बाद पीपल की 7 या 9 बार परिक्रमा अवश्य करें।
छाया दान: एक कांसे की कटोरी में सरसों का तेल भरकर उसमें अपना चेहरा देखें और फिर उस तेल को दान कर दें।
हनुमान चालीसा का पाठ: शनि देव ने हनुमान जी को वचन दिया था कि वे उनके भक्तों को कभी परेशान नहीं करेंगे। इसलिए आज पीपल के नीचे बैठकर हनुमान चालीसा पढ़ें।
काले तिल का दान: शनि देव को काली वस्तुएं प्रिय हैं। आज काले तिल, काली उड़द की दाल या काले वस्त्रों का दान करें।
काले कुत्ते को रोटी: शनिवार के दिन काले कुत्ते को सरसों का तेल लगी हुई रोटी खिलाने से राहु-केतु और शनि तीनों के दोष शांत होते हैं।
शमी के पौधे की पूजा: पीपल के साथ-साथ आज शमी के पौधे के पास दीपक जलाने से भी शनि देव अत्यंत प्रसन्न होते हैं।