गुजरात के प्रभास पाटन में अरब सागर के तट पर स्थित प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ का इतिहास संघर्ष और विजय की एक अद्भुत दास्तां है। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मंदिर के पुनर्निर्माण की 75वीं वर्षगांठ यानी 'सोमनाथ अमृत महोत्सव' में हिस्सा लेने के लिए गुजरात पहुँच रहे हैं।
आज से ठीक 1,000 साल पहले, जनवरी 1026 में महमूद गजनी ने सोमनाथ पर हमला किया था। यह हमला केवल धन लूटने के लिए नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना को तोड़ने का प्रयास था। उसने ज्योतिर्लिंग को खंडित किया और मंदिर को मटियामेट कर दिया। लेकिन गजनी यह भूल गया कि आस्था को ध्वस्त नहीं किया जा सकता।
इतिहास गवाह है कि गजनी से लेकर अलाउद्दीन खिलजी और औरंगजेब तक, इस मंदिर पर 17 बार हमले हुए। लेकिन हर विनाश के बाद किसी न किसी महापुरुष ने इसे फिर से खड़ा किया:
राजा भीमदेव, राजा भोज, और कुमारपाल जैसे शासकों ने समय-समय पर इसका जीर्णोद्धार कराया।
रानी अहिल्याबाई होलकर ने भी मंदिर की भव्यता को बनाए रखने के लिए नया मंदिर बनवाया।
स्वतंत्रता के बाद, सरदार वल्लभभाई पटेल ने खंडहरों को देखकर संकल्प लिया— "जब तक सोमनाथ का भव्य मंदिर फिर से खड़ा नहीं होता, भारत की आत्मा शांत नहीं होगी।"
11 मई 1951: भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने नवनिर्मित मंदिर में ज्योतिर्लिंग की प्राण-प्रतिष्ठा की। उन्होंने तब कहा था, "सोमनाथ का मंदिर यह घोषणा करता है कि निर्माण की शक्ति विनाश की शक्ति से हमेशा बड़ी होती है।"
आज 2026 में, जब मंदिर के उस ऐतिहासिक दिन को 75 वर्ष पूरे हो रहे हैं, सोमनाथ एक नए अवतार में है:
अमृत महोत्सव: 8 मई से 11 मई तक चलने वाले इस महोत्सव में 51 ब्राह्मण 'अतिरुद्र पाठ' कर रहे हैं।
विशेष आयोजन: कल (11 मई) को मंदिर के शिखर पर 11 पवित्र तीर्थों के जल से 'कुंभाभिषेक' और ध्वजारोहण होगा। प्रधानमंत्री इस अवसर पर विशेष स्मारक सिक्का और डाक टिकट भी जारी करेंगे।
1000 दिनों की पूजा: गजनी के हमले के 1000 साल पूरे होने पर, मंदिर में अगले 1000 दिनों तक विशेष "विजय पूजा" का संकल्प लिया गया है।
कैलाश महामेरु प्रसाद शैली: वर्तमान मंदिर अपनी अद्भुत नक्काशी और समुद्र के किनारे अडिग खड़े रहने की कला के लिए जाना जाता है।
बाण स्तंभ: मंदिर के प्रांगण में खड़ा बाण स्तंभ बताता है कि यहाँ से दक्षिण ध्रुव (South Pole) तक समुद्र के बीच कोई अवरोध नहीं है—जो हमारे पूर्वजों के भूगोल ज्ञान का प्रमाण है।
यदि आप आज सोमनाथ में हैं, तो रात का 'Light and Sound Show' देखना न भूलें, जो अमिताभ बच्चन की आवाज़ में मंदिर के इस पूरे इतिहास को जीवंत कर देता है।