नई दिल्ली: आज के आधुनिक युग में भले ही लोग जादू-टोने और तांत्रिक क्रियाओं को विज्ञान की कसौटी पर कसते हों, लेकिन ग्रामीण भारत और लोक मान्यताओं में आज भी 'नज़र उतारने' और 'झाड़-फूंक' की परंपराएं जीवित हैं। यदि आपने कभी इन तांत्रिक मंत्रों को ध्यान से सुना हो, तो उनमें एक नाम बार-बार आता है— 'लोना चमारिन'। आखिर कौन थी यह महिला जिसका नाम लिए बिना बड़े से बड़ा तांत्रिक मंत्र अधूरा माना जाता है?
लोना चमारिन का इतिहास जितना रहस्यमयी है, उतना ही प्रभावशाली भी। उन्हें शाबर मंत्रों की अधिष्ठात्री देवी के रूप में देखा जाता है। शाबर मंत्र वे होते हैं जो सरल, लोकभाषा (जैसे देहाती या मिश्रित भाषा) में होते हैं और बहुत जल्दी सिद्ध हो जाते हैं। इन मंत्रों में अक्सर यह पंक्ति आती है— "दुहाई लोना चमारिन की"। मान्यता है कि उनके नाम की दुहाई देने मात्र से कठिन से कठिन बाधा टल जाती है।
इतिहास और लोक कथाओं के अनुसार:
गुरु और शिक्षा: लोना चमारिन बचपन से ही 'इसमाइल जोगी' की शिष्या थीं। इसमाइल जोगी अपने समय के बहुत बड़े तांत्रिक थे और उन्हीं से लोना ने तंत्र की बारीकियां सीखी थीं।
साहित्यिक प्रमाण: आपको जानकर हैरानी होगी कि मलिक मोहम्मद जायसी के सुप्रसिद्ध महाकाव्य 'पद्मावत' में भी लोना चमारिन का उल्लेख मिलता है, जो उनकी ऐतिहासिकता और प्रभाव को दर्शाता है।
विद्वानों और विभिन्न राज्यों की लोक कथाओं में उनके बारे में अलग-अलग बातें कही गई हैं:
अमृतसर का संबंध: कुछ लोग मानते हैं कि वे पंजाब के अमृतसर के पास 'चमार' गांव की रहने वाली एक महान जादूगरनी थीं।
गुरु गोरखनाथ से जुड़ाव: एक मत यह भी है कि वे गुरु गोरखनाथ की शिष्या थीं और उन्हीं के आशीर्वाद से उन्हें सिद्धियां प्राप्त हुई थीं।
गोगा जी महाराज की दासी: राजस्थान की लोक मान्यताओं में उन्हें गुरु गोगा जी महाराज की माता की दासी के रूप में भी जाना जाता है, जिनके पास गोगा देव की विशेष सिद्धियां थीं।
लोना चमारिन के मंत्र संस्कृत की कठिन शब्दावली के बजाय आम बोलचाल की भाषा में थे, इसलिए ये गांवों और कस्बों में तेज़ी से फैले। तंत्र शास्त्र के अनुसार, इनकी साधना बहुत जल्दी फल देती है। आज भी इंटरनेट पर 'बुरी नज़र' या 'तंत्र बाधा' से मुक्ति के लिए उनके नाम से जुड़े शाबर मंत्र सबसे अधिक सर्च किए जाते हैं।