उत्तराखंड की शांत वादियों में बसा कैंची धाम (Kainchi Dham) आज किसी परिचय का मोहताज नहीं है। नैनीताल-अल्मोड़ा मार्ग पर स्थित यह पवित्र आश्रम बाबा नीम करोली (Neem Karoli Baba) की तपोस्थली है। देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु यहाँ सिर्फ एक आस लेकर आते हैं—बाबा का आशीर्वाद और असीम मानसिक शांति।
चाहे टेक जगत के दिग्गज स्टीव जॉब्स (Steve Jobs) और मार्क जुकरबर्ग (Mark Zuckerberg) हों, या भारतीय क्रिकेटर विराट कोहली, हर किसी ने बाबा के दर पर शीश नवाया है और उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आए हैं। यदि आप भी कैंची धाम की यात्रा का प्लान बना रहे हैं, तो यह लेख आपके लिए मार्गदर्शक साबित होगा।
कैंची धाम आश्रम की स्थापना 15 जून 1964 को महाराज जी (बाबा नीम करोली) द्वारा की गई थी।
'कैंची' नाम क्यों पड़ा?: स्थानीय भाषा में इस जगह को 'कैंची' इसलिए कहा जाता है क्योंकि जहाँ यह आश्रम स्थित है, वहाँ की सड़क दो तीखे मोड़ों (Hairpin Bends) से मिलकर कैंची जैसी आकृति बनाती है।
स्थापना की कथा: बाबा नीम करोली और महान संत पूर्णानंद जी ने मिलकर यहाँ एक गुफा के पास ध्यान लगाया था, जिसके बाद यहाँ हनुमान जी के मंदिर और आश्रम की नींव रखी गई।
कैंची धाम आश्रम भक्तों के लिए पूरे साल खुला रहता है, लेकिन सर्दियों और गर्मियों में इसके समय में थोड़ा बदलाव होता है:
गर्मियों में (Summer Timings): प्रातः 06:00 बजे से रात्रि 08:00 बजे तक।
सर्दियों में (Winter Timings): प्रातः 07:00 बजे से शाम 06:00 बजे तक।
प्रातः कालीन आरती: सुबह सूर्योदय के समय (लगभग 6:30 से 7:00 बजे)।
सायं कालीन आरती: शाम को सूर्यास्त के समय (लगभग 6:30 से 7:15 बजे)।
नोट: आरती के समय आश्रम में हनुमान चालीसा और बाबा के भजनों का गान होता है, जो मन को भीतर तक झंकृत कर देता है।
कैंची धाम का सबसे बड़ा उत्सव हर साल 15 जून को मनाया जाता है। इस दिन आश्रम का स्थापना दिवस होता है।
मालपुए का प्रसाद: इस विशेष दिन पर यहाँ विशाल भंडारे का आयोजन होता है, जहाँ आने वाले हर भक्त को बाबा का प्रिय 'मालपुआ प्रसाद' वितरित किया जाता है।
यात्री ध्यान दें: 15 जून के आस-पास यहाँ लाखों की भीड़ होती है, इसलिए यदि आप शांति से दर्शन करना चाहते हैं, तो जून के महीने को छोड़कर अन्य महीनों में यात्रा प्लान करें।
कैंची धाम पहुंचना बेहद आसान है क्योंकि यह मुख्य हाईवे से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है:
हवाई मार्ग से (By Air): सबसे नजदीकी हवाई अड्डा पंतनगर (Pantnagar Airport) है, जो आश्रम से लगभग 70 किलोमीटर दूर है। वहाँ से आप सीधे टैक्सी कर सकते हैं।
रेल मार्ग से (By Train): सबसे पास का रेलवे स्टेशन काठगोदाम (Kathgodam Railway Station) है, जो लगभग 45 किलोमीटर की दूरी पर है। काठगोदाम से कैंची धाम के लिए नियमित रूप से बसें और शेयरिंग टैक्सियाँ (Maxx/Bolero) उपलब्ध रहती हैं।
सड़क मार्ग से (By Road): यह आश्रम नैनीताल से मात्र 18 किलोमीटर की दूरी पर है। आप हल्द्वानी या नैनीताल से अल्मोड़ा जाने वाली किसी भी बस या टैक्सी से सीधे आश्रम के गेट पर उतर सकते हैं।
नहीं, आम श्रद्धालुओं के लिए आश्रम के भीतर रात में ठहरने की अनुमति नहीं है। दर्शन करने के बाद आप बाहर भवाली, नैनीताल या काठगोदाम में होटल ले सकते हैं।
बाबा नीम करोली एक महान दिव्य संत थे, जिन्हें उनके भक्त भगवान हनुमान जी का साक्षात अवतार मानते हैं। उन्होंने 11 सितंबर 1973 को महासमाधि ली थी।
मार्च से जून और सितंबर से नवंबर के बीच का मौसम यहाँ जाने के लिए सबसे सुखद और बेहतरीन माना जाता है।