गंगोत्री मंदिर

गंगोत्री मंदिर

महत्वपूर्ण जानकारी

  • स्थान: गंगोत्री, उत्तराखंड 249135, भारत
  • 2021 में मंदिर का उद्घाटन तिथि: गंगोत्री मंदिर का कपाट शनिवार 15 मई 2021 को खुलेगा।
  • 2021 में मंदिर समापन तिथि: गुरुवार, 4 नवंबर 2021।
  • निकटतम हवाई अड्डा: गंगोत्री मंदिर से लगभग 279 किलोमीटर की दूरी पर देहरादून का जॉली ग्रांट हवाई अड्डा।
  • निकटतम रेलवे स्टेशन: गंगोत्री मंदिर से लगभग 264 किलोमीटर की दूरी पर ऋषिकेश रेलवे स्टेशन।

गंगोत्री मंदिर देवी गंगा को पूर्णतः समर्पित है। यह मंदिर भारत के राज्य उत्तराखण्ड, उत्तरकाशी जिले में है। यह मंदिर उत्तरकाशी से 100 किमी की दूरी पर स्थित है। गंगोत्री मंदिर हिन्दुओं का एक पवित्र व तीर्थ स्थान है। गंगोत्री मंदिर भागीरथी नदी के तट पर स्थित है। गंगोत्री मंदिर का नाम चार धाम यात्रा में सम्मिलित है। यह मंदिर 3,100 मीटर (10,200 फीट) की ऊंचाई पर ग्रेटर हिमालय रेंज पर स्थित है। यह स्थान गंगा नदी का उद्रम स्थान है। यह मंदिर गंगा भारत का सबसे प्रमुख मंदिर है।

गंगा मैया के मंदिर का निर्माण गोरखा कमांडर अमर सिंह थापा द्वारा 18वीं शताब्दी के शुरूआत में किया गया था वर्तमान मंदिर का पुननिर्माण जयपुर के राजघराने द्वारा किया गया था।

पौराणिक कथाओ के अनुसार भगवान श्री रामचंद्र के पूर्वज रघुकुल के चक्रवर्ती राजा भगीरथ ने यहां एक पवित्र शिलाखंड पर बैठकर भगवान शंकर की प्रचंड तपस्या की थी। इस पवित्र शिलाखंड के निकट ही 18वीं शताब्दी में इस मंदिर का निर्माण किया गया। ऐसी मान्यता है कि देवी भागीरथी ने इसी स्थान पर धरती का स्पर्श किया।

ऐसी भी मान्यता है कि पांडवो ने भी महाभारत के युद्ध में मारे गये अपने परिजनो की आत्मिक शांति के निमित इसी स्थान पर आकर एक महान देव यज्ञ का अनुष्ठान किया था। यह पवित्र एवं उत्कृष्ठ मंदिर सफेद ग्रेनाइट के चमकदार 20 फीट ऊंचे पत्थरों से निर्मित है।

शिवलिंग के रूप में एक नैसर्गिक चट्टान भागीरथी नदी में जलमग्न है। यह दृश्य अत्यधिक मनोहार एवं आकर्षक है। इसके देखने से दैवी शक्ति की प्रत्यक्ष अनुभूति होती है। पौराणिक आख्यानो के अनुसार, भगवान शिव इस स्थान पर अपनी जटाओ को फैला कर बैठ गए और उन्होने गंगा माता को अपनी घुंघराली जटाओ में लपेट दिया। शीतकाल के आरंभ में जब गंगा का स्तर काफी अधिक नीचे चला जाता है तब उस अवसर पर ही उक्त पवित्र शिवलिंग के दर्शन होते है।

प्रत्येक वर्ष मई से अक्टूबर के महीनो के बीच पतित पावनी गंगा मैंया के दर्शन करने के लिए लाखो श्रद्धालु तीर्थयात्री यहां आते है। यमुनोत्री की ही तरह गंगोत्री का पतित पावन मंदिर भी अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर खुलता है और दीपावली के दिन मंदिर के कपाट बंद होते है। क्योकि भारी बर्फबारी की वजह से सर्दियों के दौरान यह मंदिर बंद रहता है।



Ganga Mata Festival(s)



फोटो गैलरी




2021 के आगामी त्यौहार और व्रत











दिव्य समाचार










आप यह भी देख सकते हैं


Humble request: Write your valuable suggestions in the comment box below to make the website better and share this informative treasure with your friends. If there is any error / correction, you can also contact me through e-mail by clicking here. Thank you.

EN हिं