रुद्रप्रयाग/नांदेड़, 16 फरवरी 2026: विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम के मुख्य पुजारी (रावल) की नियुक्ति को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। वर्तमान रावल, 1008 भीमाशंकर लिंग शिवाचार्य महास्वामी, जिन्होंने पिछले 25 वर्षों से बाबा केदार की सेवा की है, उन्होंने स्वास्थ्य कारणों से अपने पद से निवृत्त होने की घोषणा की है।
महाराष्ट्र के नांदेड़ स्थित अपने मठ में एक धार्मिक समारोह के दौरान, रावल भीमाशंकर लिंग ने अपने शिष्य शिवाचार्य शांति लिंग (केदार लिंग) को अपना उत्तराधिकारी और 325वां रावल नामित किया है।
विवाद कहाँ है? बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) ने इस सीधी घोषणा पर सवाल उठाए हैं। समिति का कहना है कि:
रावल की नियुक्ति केवल व्यक्तिगत इच्छा पर नहीं, बल्कि BKTC अधिनियम 1939 के तहत तय नियमों के अनुसार होती है।
रावल तकनीकी रूप से मंदिर समिति के अधीन होते हैं, इसलिए उत्तराधिकारी की अंतिम मुहर समिति की जांच और चयन प्रक्रिया के बाद ही लगती है।
केदारनाथ धाम में रावल की परंपरा आदि गुरु शंकराचार्य के समय से चली आ रही है। इसके कुछ कड़े नियम हैं:
समुदाय: रावल अनिवार्य रूप से दक्षिण भारत (कर्नाटक) के वीरशैव लिंगायत समुदाय से होने चाहिए।
ब्रह्मचर्य: पद पर रहने के लिए रावल का अविवाहित (ब्रह्मचारी) होना अनिवार्य है।
दायित्व: कपाट खुलने और बंद होने के समय रावल की उपस्थिति अनिवार्य होती है। हालांकि, वे स्वयं गर्भगृह में पूजा नहीं करते, बल्कि उनके द्वारा नियुक्त पुजारी पूजा संपन्न करते हैं।
BKTC अध्यक्ष ने स्पष्ट किया है कि जब तक वर्तमान रावल का औपचारिक इस्तीफा समिति को नहीं मिल जाता, तब तक नई नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू नहीं की जा सकती। आने वाले दिनों में एक चयन समिति का गठन किया जा सकता है, जो उत्तराधिकारी के नाम पर विचार करेगी।