नाग चतुर्थी 2026 - सर्प देवताओं की पूजा का पावन पर्व

महत्वपूर्ण जानकारी

  • नाग चतुर्थी 2026
  • रविवार, 16 अगस्त 2026
  • चतुर्थी प्रारंभ: 15 अगस्त 2026 शाम 05:29 बजे
  • चतुर्थी समाप्त: 16 अगस्त 2026 शाम 04:53 बजे

श्रावण मास का विशेष त्योहार: विषहरण और समृद्धि का प्रतीक

हिंदू धर्म में श्रावण मास को भगवान शिव की भक्ति का महीना माना जाता है, लेकिन इस मास की चतुर्थी तिथि पर मनाया जाने वाला नाग चतुर्थी व्रत अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह पर्व सर्प देवताओं की पूजा को समर्पित है, जो प्रकृति के संतुलन, विषहरण और परिवार की रक्षा के प्रतीक के रूप में पूजे जाते हैं। नाग चतुर्थी श्रावण शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मनाई जाती है, जो आमतौर पर जुलाई-अगस्त में आती है। इस लेख में हम नाग चतुर्थी के महत्व, कथा, पूजा विधि और लाभों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

नाग चतुर्थी का महत्व: प्रकृति और कर्म का संदेश

नाग चतुर्थी का उत्सव सर्पों को देवता के रूप में सम्मान देने का अवसर प्रदान करता है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, सर्प भूमि के देवता हैं और वे वर्षा, उर्वरता तथा समृद्धि के कारक हैं। इस दिन नाग पूजा करने से सर्प भय, विष दोष तथा परिवार में आने वाली विपत्तियों से मुक्ति मिलती है।

महाभारत की कथा के अनुसार, राजा जनमेजय के पिता परिक्षित को तक्षक नाग ने काट लिया था। क्रोधित जनमेजय ने सार्प सत्र का आयोजन किया, जिसमें सभी नागों को आहुति दी जा रही थी। तब आस्तिक ऋषि ने सत्र रोक दिया। इस घटना से प्रेरित होकर नाग चतुर्थी पर सर्पों की रक्षा और पूजा की परंपरा चली आ रही है। यह पर्व हमें पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देता है—सर्पों को मारने के बजाय उन्हें सम्मान दें, क्योंकि वे पारिस्थितिकी तंत्र के महत्वपूर्ण हिस्से हैं।

नाग चतुर्थी की पौराणिक कथा: तक्षक और आस्तिक का प्रसंग

पुराणों में नाग चतुर्थी की कथा अत्यंत रोचक है। एक बार राजा परिक्षित जंगल में शिकार कर रहे थे। थकान के कारण वे एक वृक्ष के नीचे विश्राम करने लगे। उसी समय ऋषि शमीक मुनी ध्यानमग्न थे। परिक्षित ने उनका ध्यान भंग करने के लिए मृत सर्प का फंदा उनके गले में डाल दिया। शमीक के पुत्र शरंगधर ने यह देखा तो क्रोधित होकर श्राप दे दिया कि सातवें दिन तक्षक नाग परिक्षित को काट लेगा।

श्राप के फलस्वरूप परिक्षित की मृत्यु हो गई। पुत्र जनमेजय ने बदला लेने के लिए यज्ञ में सभी नागों को आमंत्रित किया। हजारों नाग आग में गिरने लगे। तक्षक भी गिरने वाला था, लेकिन आस्तिक ऋषि ने जनमेजय से विनती की और सत्र रोक दिया। इस कथा से सीख मिलती है कि क्रोध और हिंसा का अंत क्षमा से होता है। नाग चतुर्थी इसी क्षमा और पूजा का प्रतीक है।

पूजा विधि: सरल और प्रभावी अनुष्ठान

नाग चतुर्थी की पूजा विधि अत्यंत सरल है, जो घर पर आसानी से की जा सकती है। इस दिन प्रातःकाल स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल पर गंगाजल छिड़कें और स्वच्छता का ध्यान रखें। मुख्य सामग्री में दूध, दही, घी, शहद, चंदन, फूल, बिल्व पत्र, धतूरा, कलावे और नाग की मूर्ति या चित्र शामिल होते हैं।

चरणबद्ध पूजा विधि:

  1. कलश स्थापना: एक तांबे या मिट्टी के कलश में जल भरें, उसमें सुपारी, सुपाला, दूर्वा और फूल डालें। कलश पर स्वस्तिक बनाएं।
  2. नाग पूजा: नाग देवता की मूर्ति या चित्र को आसन पर स्थापित करें। उन्हें दूध से स्नान कराएं और पंचामृत अर्पित करें।
  3. मंत्र जाप: "ॐ नागाय नमः" या "नाग देवता पूजन मंत्र" का 108 बार जाप करें। यदि संभव हो तो पंडित जी से हवन करवाएं।
  4. आरती और प्रसाद: पूजा के अंत में आरती उतारें। प्रसाद के रूप में दूध-भाप (खीर) और फल वितरित करें। व्रत रखने वाले निर्जल या फलाहार पर रहें।
  5. विशेष टिप: इस दिन सर्पों को हानि न पहुंचाएं और तीर्थ स्थलों जैसे त्र्यंबकेश्वर या नागेश्वर मंदिर में दर्शन करें।

महाराष्ट्र, कर्नाटक और गुजरात में यह पर्व विशेष उत्साह से मनाया जाता है, जहां नाग पंचमी के साथ जोड़कर विविध नृत्य और लोकगीत गाए जाते हैं।

नाग चतुर्थी के लाभ: आध्यात्मिक और वैज्ञानिक दृष्टि

नाग चतुर्थी की पूजा से न केवल आध्यात्मिक लाभ मिलते हैं, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से भी यह उपयोगी है। ज्योतिष शास्त्र में राहु-केतु दोष निवारण के लिए नाग पूजा अनिवार्य मानी जाती है। यह पर्व कुंडली में नाग दोष को शांत करता है और संतान प्राप्ति, धन लाभ तथा रोग निवारण में सहायक होता है।

वैज्ञानिक रूप से, सर्प विष का उपयोग चिकित्सा में होता है (जैसे एंटी-स्नेक वेनम), और इस पर्व से सर्प संरक्षण की जागरूकता बढ़ती है। यह हमें सिखाता है कि प्रकृति के सभी प्राणी महत्वपूर्ण हैं।

निष्कर्ष: सर्प पूजा से जीवन में शांति

नाग चतुर्थी श्रावण मास का एक अनमोल रत्न है, जो हमें हिंसा त्यागकर करुणा अपनाने की प्रेरणा देता है। इस पावन पर्व पर नाग देवताओं की कृपा प्राप्त करने के लिए पूजा करें और पर्यावरण रक्षा का संकल्प लें। याद रखें, सर्प जैसा छोटा प्राणी भी ब्रह्मांड के संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। नाग चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएं!

यह लेख हिंदू शास्त्रों और परंपराओं पर आधारित है। पूजा से पूर्व किसी विद्वान पंडित से परामर्श अवश्य लें।




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