उत्तराखंड: कड़ाके की ठंड में भी 'शीतकालीन चारधाम यात्रा' ने तोड़े रिकॉर्ड; ऊखीमठ में बाबा केदार के दर्शन को उमड़ा जनसैलाब

देहरादून/ऊखीमठ, 20 जनवरी 2026: उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्रों में कपाट बंद होने और भारी बर्फबारी के बावजूद, श्रद्धालुओं की आस्था कम होने का नाम नहीं ले रही है। इस वर्ष 'शीतकालीन चारधाम यात्रा' (Winter Char Dham Yatra) में श्रद्धालुओं की संख्या ने पिछले कई वर्षों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, 15 जनवरी 2026 तक 27,000 से अधिक श्रद्धालुओं ने भगवान के शीतकालीन प्रवास स्थलों पर मत्था टेका है।

ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ: बना मुख्य आकर्षण

शीतकालीन यात्रा में सबसे अधिक भीड़ बाबा केदार के दर्शन के लिए देखी जा रही है।

  • रिकॉर्ड भीड़: कुल श्रद्धालुओं में से अकेले 17,000 श्रद्धालु ऊखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर पहुंचे हैं। यहाँ भगवान केदारनाथ की शीतकालीन पूजा की जाती है।

  • आकर्षण का केंद्र: भक्त बाबा केदार की डोली के दर्शन और हिमालय की शांत वादियों में आध्यात्मिक शांति पाने के लिए भारी ठंड के बीच यहाँ पहुँच रहे हैं।

अन्य शीतकालीन पड़ावों की स्थिति

ओंकारेश्वर मंदिर के अलावा, अन्य तीन धामों के शीतकालीन प्रवास स्थलों पर भी रौनक बनी हुई है:

  • पांडुकेश्वर (बदरीनाथ): भगवान बदरीविशाल की पूजा इन दिनों पांडुकेश्वर के योगध्यान बदरी मंदिर में हो रही है, जहाँ हज़ारों की संख्या में लोग पहुँच रहे हैं।

  • मुखवा (गंगोत्री): माँ गंगा की शीतकालीन पूजा मुखवा के गंगा मंदिर में की जा रही है।

  • खरसाली (यमुनोत्री): यमुना माँ के दर्शन के लिए श्रद्धालु खरसाली स्थित प्राचीन मंदिर में हाजिरी लगा रहे हैं।

क्यों बढ़ रहा है शीतकालीन यात्रा का रुझान?

विशेषज्ञों और स्थानीय प्रशासन का मानना है कि इसके पीछे तीन मुख्य कारण हैं:

  1. भीड़ से बचाव: गर्मियों के सीजन में होने वाली अत्यधिक भीड़ और लंबी लाइनों से बचने के लिए कई लोग अब शांति से दर्शन करने के लिए शीतकाल को चुन रहे हैं।

  2. बेहतर कनेक्टिविटी: उत्तराखंड सरकार द्वारा ऑल वेदर रोड और शीतकालीन प्रवास स्थलों तक पहुँचने के मार्गों को दुरुस्त करने से यात्रा आसान हुई है।

  3. बर्फबारी का आनंद: दर्शन के साथ-साथ श्रद्धालु पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी का लुत्फ उठाने के लिए भी इन धार्मिक स्थलों का रुख कर रहे हैं।

प्रशासन की तैयारी

बढ़ती भीड़ को देखते हुए पर्यटन विभाग और मंदिर समितियों ने रहने और अलाव की विशेष व्यवस्था की है। श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे भारी ऊनी कपड़े साथ रखें क्योंकि ऊखीमठ और पांडुकेश्वर में तापमान शून्य से नीचे जा रहा है।


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