मॉरीशस: 'गंगा तलाव' पर महाशिवरात्रि 2026 की तैयारियां शुरू, 'ग्रैंड बेसिन' में उमड़ेगा आस्था का सैलाब

मॉरीशस: 'गंगा तलाव' पर महाशिवरात्रि 2026 की तैयारियां शुरू, 'ग्रैंड बेसिन' में उमड़ेगा आस्था का सैलाब

पोर्ट लुइस (मॉरीशस), 5 जनवरी 2026: मॉरीशस में बसे हिंदू समुदाय के लिए आस्था के सबसे बड़े केंद्र 'गंगा तलाव' (Grand Basin) पर महाशिवरात्रि 2026 की तैयारियां आधिकारिक रूप से शुरू हो गई हैं। भारत के बाहर दुनिया के सबसे बड़े हिंदू तीर्थस्थलों में से एक माना जाने वाला यह स्थान अगले कुछ हफ्तों में लाखों 'शिवभक्तों' की पदयात्रा का साक्षी बनेगा।

गंगा तलाव: मॉरीशस की 'छोटी काशी'

समुद्र तल से लगभग 1800 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह एक प्राकृतिक 'क्रेटर झील' (Crater Lake) है। हिंदू प्रवासियों के लिए इसका महत्व भारत की गंगा नदी के समान है।

  • ऐतिहासिक जुड़ाव: साल 1972 में भारत की पवित्र गंगा नदी का जल लाकर इस झील में मिलाया गया था, जिसके बाद इसका नाम 'गंगा तलाव' पड़ा।

  • मंगल महादेव की भव्यता: झील के प्रवेश द्वार पर 108 फीट (33 मीटर) ऊंची भगवान शिव की विशाल प्रतिमा 'मंगल महादेव' भक्तों का स्वागत करती है। यह प्रतिमा गुजरात के वडोदरा में स्थित सुरसागर झील की शिव प्रतिमा की प्रतिकृति है।

कावड़ यात्रा और कठिन साधना

महाशिवरात्रि (15 फरवरी 2026) से हफ्तों पहले ही श्रद्धालु अपने गांवों और शहरों से पैदल यात्रा शुरू कर देते हैं।

  1. स्वयं निर्मित कावड़: युवा भक्त लकड़ी, बांस और रंगीन कागजों से भव्य 'कावड़' (Kanwars) तैयार करते हैं। कुछ कावड़ इतने विशाल होते हैं कि उन्हें ले जाने के लिए दर्जनों लोगों की जरूरत पड़ती है।

  2. सात्विक जीवन: यात्रा शुरू करने से पहले भक्त कड़े अनुशासन का पालन करते हैं, जिसमें शुद्ध शाकाहारी भोजन और आध्यात्मिक मनन शामिल है।

  3. पवित्र जल: श्रद्धालु गंगा तलाव पहुंचकर वहां से पवित्र जल भरते हैं और फिर पैदल लौटकर अपने स्थानीय शिवालयों में भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं।

प्रशासनिक और सामुदायिक व्यवस्था

मॉरीशस सरकार और 'हिंदू महा सभा' ने तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम किए हैं:

  • सेवा शिविर: पदयात्रियों के लिए रास्ते में जगह-जगह स्वयंसेवकों द्वारा भोजन, पानी और चिकित्सा सहायता के लिए शिविर लगाए गए हैं।

  • सुरक्षा: भारी भीड़ को देखते हुए ट्रैफिक प्रबंधन और सुरक्षा के लिए विशेष पुलिस बल तैनात किया गया है।

निष्कर्ष: मॉरीशस की महाशिवरात्रि केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह उन गिरमिटिया मजदूरों की विरासत है जिन्होंने सात समंदर पार भी अपनी जड़ों और संस्कृति को न केवल बचाए रखा, बल्कि उसे एक वैश्विक पहचान दी।



प्रश्न और उत्तर



आप इन्हें भी पढ़ सकते हैं




2026 के आगामी त्यौहार और व्रत











दिव्य समाचार











Humble request: Write your valuable suggestions in the comment box below to make the website better and share this informative treasure with your friends. If there is any error / correction, you can also contact me through e-mail by clicking here. Thank you.

EN हिं