कोलंबो/नुवारा एलिया, 8 जनवरी 2026: श्रीलंका सरकार ने भारत के साथ अपने सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों को और मजबूत करने के लिए एक महत्वाकांक्षी परियोजना की शुरुआत की है। आज से नुवारा एलिया स्थित ऐतिहासिक सीता एलिया (Seetha Eliya) मंदिर और अशोक वाटिका के सुंदरीकरण एवं विस्तार का कार्य औपचारिक रूप से शुरू हो गया है। इस परियोजना का उद्देश्य न केवल पर्यटन को बढ़ावा देना है, बल्कि रामायण काल के इन पवित्र स्थलों को उनकी प्राचीन गरिमा के अनुरूप आधुनिक सुविधाओं से लैस करना भी है।
नुवारा एलिया की पहाड़ियों के बीच स्थित यह क्षेत्र हिंदू धर्म में गहरा महत्व रखता है।
अशोक वाटिका का कायाकल्प: पौराणिक कथाओं के अनुसार, रावण ने माता सीता को इसी वाटिका में बंदी बनाकर रखा था। अब इस पूरे क्षेत्र को एक 'हेरिटेज गार्डन' के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां रामायण काल में वर्णित पौधों और पेड़ों को फिर से लगाया जाएगा।
सीता एलिया मंदिर: यहाँ स्थित सीता अम्मन मंदिर के आसपास एक विशाल मेडिटेशन हॉल (ध्यान केंद्र) और तीर्थयात्री निवास का निर्माण किया जा रहा है। हाल ही में भारत के सहयोग से यहाँ एक नए ध्यान केंद्र का उद्घाटन भी किया गया था।
पर्यटकों की सुविधा के लिए श्रीलंका पर्यटन विभाग ने एक 'इंटरैक्टिव डिजिटल मैप' (Interactive Digital Map) लॉन्च किया है।
सटीक जानकारी: यह मैप भारत और श्रीलंका के बीच रामायण से जुड़े सभी 52 स्थलों (जैसे - मनावरी, मुन्नेश्वरम, रावण गुफा और दिव्यास्त्र झील) को आपस में जोड़ता है।
नेविगेशन: तीर्थयात्री अब मोबाइल के जरिए इन दुर्गम स्थलों तक आसानी से पहुँच सकते हैं और प्रत्येक स्थल के ऐतिहासिक महत्व को सुन सकते हैं।
श्रीलंका के पर्यटन मंत्री ने कहा कि भारत से आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए विशेष 'वीजा-ऑन-अराइवल' और 'रामायण सर्किट' टूर पैकेज भी जारी किए जा रहे हैं। अशोक वाटिका में बन रहे नए फुटपाथ, लाइटिंग और बैठने की व्यवस्था से बुजुर्ग श्रद्धालुओं को सबसे ज्यादा लाभ होगा। प्रशासन को उम्मीद है कि 2026 के अंत तक रामायण ट्रेल पर आने वाले पर्यटकों की संख्या में 50% की वृद्धि होगी।