वरलक्ष्मी व्रत 2026: सावन के आखिरी शुक्रवार पर करें यह महाव्रत, बरसेगी माता 'अष्टलक्ष्मी' की कृपा

महत्वपूर्ण जानकारी

  • Varalakshmi Vrat 2026
  • Friday, August 28, 2026.

सावन का महीना आते ही हम सभी भगवान शिव की भक्ति में लीन हो जाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सावन का महीना धन और ऐश्वर्य की देवी माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए भी सबसे शुभ माना जाता है?

सावन पूर्णिमा से ठीक पहले आने वाले शुक्रवार को 'वरलक्ष्मी व्रत' (Varalakshmi Vrat) रखा जाता है। इस साल यह अत्यंत शुभ और फलदायी व्रत 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार) को पड़ रहा है।

'वर' का अर्थ है वरदान (Boon) और 'लक्ष्मी' यानी धन-धान्य की देवी। मान्यता है कि जो भी महिला या पुरुष इस दिन सच्चे मन से माता वरलक्ष्मी की पूजा करता है, उसे जीवन में कभी पैसों की तंगी या दरिद्रता का सामना नहीं करना पड़ता। आइए जानते हैं इस महाव्रत की कथा, महत्व और पूजा का तरीका।

🌸 1. वरलक्ष्मी व्रत का अद्भुत महत्व

पुराणों के अनुसार, केवल एक वरलक्ष्मी व्रत रखने से माता लक्ष्मी के आठों रूपों (अष्टलक्ष्मी) की पूजा का फल एक साथ मिल जाता है। अष्टलक्ष्मी यानी— धन, धान्य, प्रेम, शक्ति, शांति, विद्या, यश और आरोग्य।

  • सुहागिन महिलाओं के लिए: महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, नौकरी/व्यापार में तरक्की और घर की सुख-शांति के लिए यह व्रत रखती हैं।

  • अखंड सौभाग्य: मान्यता है कि इस दिन माता लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और अपने भक्तों की हर मुराद पूरी करती हैं।

📖 2. माता के सपने में आने की पौराणिक कथा

मगध देश में चारुमती नाम की एक अत्यंत पतिव्रता और संस्कारी स्त्री रहती थी। वह अपने सास-ससुर की सेवा और पति के प्रति पूरे समर्पण भाव से रहती थी।

चारुमती के इस निस्वार्थ प्रेम और भक्ति को देखकर माता लक्ष्मी बहुत प्रसन्न हुईं। एक रात माता लक्ष्मी ने चारुमती के सपने में आकर दर्शन दिए और कहा, "हे पुत्री! सावन पूर्णिमा से पहले आने वाले शुक्रवार को तुम मेरा 'वरलक्ष्मी व्रत' करो। इससे तुम्हारे घर में कभी किसी चीज की कमी नहीं रहेगी।"

चारुमती ने माता के बताए अनुसार अन्य महिलाओं के साथ मिलकर विधि-विधान से कलश स्थापना कर वरलक्ष्मी व्रत किया। पूजा संपन्न होते ही चमत्कार हुआ— सभी महिलाओं के शरीर गहनों से सज गए और उनके घर धन-धान्य और गायों से भर गए। तभी से इस व्रत की परंपरा शुरू हो गई।

🛕 3. पूजा विधि और कलश स्थापना

इस व्रत में कलश स्थापना का सबसे ज्यादा महत्व होता है:

  1. स्वच्छता और रंगोली: शुक्रवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। पूजा स्थल को साफ करके वहां एक सुंदर रंगोली (कोलम) बनाएं।

  2. कलश स्थापना: रंगोली के ऊपर एक पाटा (चौकी) रखें। उस पर चावल फैलाकर एक कलश (तांबे या पीतल का) रखें। कलश के अंदर जल, सिक्के, सुपारी और आम के पत्ते डालें।

  3. नारियल और मुखौटा: कलश के ऊपर एक नारियल रखें और उसे लाल कपड़े से सजाएं। कई लोग नारियल पर माता लक्ष्मी का चांदी का मुखौटा (Face) भी लगाते हैं।

  4. पीला धागा (रक्षा सूत्र): पूजा के बाद महिलाएं अपने दाहिने हाथ में 9 गांठों वाला पीला धागा (डोरक) बांधती हैं, जिसे माता का रक्षा-कवच माना जाता है।

  5. भोग: माता को खीर, फल और तरह-तरह की मिठाइयों का भोग लगाया जाता है।

🎯 लेखक के विचार

वरलक्ष्मी व्रत हमें सिखाता है कि जिस घर में महिलाओं (घर की लक्ष्मी) का सम्मान होता है और जहाँ प्रेम और स्वच्छता होती है, वहीं माता लक्ष्मी का स्थायी वास होता है। इस 28 अगस्त को अपने घर में एक छोटा सा कलश स्थापित करके माता का ध्यान जरूर करें, आपकी सारी परेशानियां दूर हो जाएंगी।

जय महालक्ष्मी! 🚩




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