कृष्णपिङ्गल संकष्टी चतुर्थी 2027: जानिए व्रत की सही तारीख, पूजा विधि, महत्व और आपके शहर में चंद्रोदय (चांद निकलने) का समय

कृष्णपिङ्गल संकष्टी चतुर्थी 2027: जानिए व्रत की सही तारीख, पूजा विधि, महत्व और आपके शहर में चंद्रोदय (चांद निकलने) का समय

सनातन हिंदू धर्म में भगवान गणेश जी की आराधना सभी संकटों को दूर करने वाली मानी गई है। प्रत्येक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाता है। वैसे तो हर महीने आने वाली चतुर्थी का अपना विशेष महत्व है, लेकिन आषाढ़ मास (निज ज्येष्ठ/आषाढ़ पूर्णिमांत) के कृष्ण पक्ष में आने वाली चतुर्थी को 'कृष्णपिङ्गल संकष्टी चतुर्थी' (Krishnapingala Sankashti Chaturthi) कहा जाता है।

वर्ष 2027 में यह पावन व्रत 22 जून 2027 (मंगलवार)  को रखा जाएगा। इस दिन भगवान गणेश के 'कृष्णपिङ्गल' स्वरूप और 'छत्रपति पीठ' की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से मानसिक अशांति, भय और करियर में आ रही सभी बाधाएं तुरंत दूर हो जाती हैं। आइए, 'द डिवाइन इंडिया' के इस विशेष लेख में जानते हैं इस व्रत का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और सबसे महत्वपूर्ण—आपके शहर में चांद निकलने का समय।

1. कृष्णपिङ्गल संकष्टी चतुर्थी 2027: शुभ मुहूर्त और तिथि समय

'द डिवाइन इंडिया पंचांग' की सटीक खगोलीय गणनाओं के अनुसार, चतुर्थी तिथि का समय इस प्रकार है:

  • चतुर्थी तिथि प्रारंभ: मंगलवार, 22 जून 2027 को दोपहर 01:07 बजे

  • चतुर्थी तिथि समाप्त: बुधवार, 23 जून 2027 को दोपहर 03:42 बजे।

  • चंद्रोदय का समय: चंद्रमा रात 09:57 बजे उगेगा

  • व्रत की तारीख: चूंकि संकष्टी चतुर्थी का व्रत रात में चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही खोला जाता है, इसलिए रात्रि व्यापिनी तिथि के सिद्धांत के अनुसार यह व्रत 22 जून 2027 (मंगलवार) को ही रखा जाएगा।

2. सबसे महत्वपूर्ण: चंद्रोदय (Moonrise) का समय

संकष्टी चतुर्थी का व्रत तब तक पूर्ण नहीं माना जाता जब तक कि रात्रि में भगवान गणेश के साथ चंद्र देव की पूजा और उन्हें अर्घ्य न दिया जाए। 🌟 यह भी देखें: रोज़ाना का सटीक शुभ मुहूर्त, राहुकाल और नक्षत्र जानने के लिए देखें आज का द डिवाइन इंडिया दैनिक पंचांग

3. सरल पूजा विधि (How to Perform Puja)

  1. प्रातः काल की पूजा: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, साफ कपड़े पहनें और गणपति बाप्पा के सामने हाथ जोड़कर व्रत का संकल्प लें। दिन भर फलाहार करते हुए सात्विक रहें।

  2. संध्या पूजा की तैयारी: शाम के समय भगवान गणेश की मूर्ति के सामने घी का दीपक जलाएं। उन्हें दूर्वा (दूब घास), मोदक या लड्डू, पीले फूल और चंदन अर्पित करें।

  3. कथा और मंत्र: संकष्टी चतुर्थी की व्रत कथा सुनें और “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप करें।

  4. चंद्र अर्घ्य: रात में जब तालिका में दिए गए समय पर चंद्रमा उदय हो, तब दूध और जल मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य दें। इसके बाद ही अपना व्रत खोलें।









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