देवभूमि उत्तराखंड का गढ़वाल हिमालय अपने भीतर रोमांच और कूट-कूट कर भरे अध्यात्म का अनूठा संगम समेटे हुए है। यदि आप एक ऐसी यात्रा की तलाश में हैं जो आपकी शारीरिक सहनशक्ति को भी परखे और आपकी आत्मा को भी असीम शांति से भर दे, तो चंद्रशिला ट्रेक (Chandrashila Trek) से बेहतर कोई विकल्प नहीं है।
समुद्र तल से लगभग 12,110 फीट (3,691 मीटर) की ऊंचाई पर स्थित चंद्रशिला का अर्थ है— "चंद्रमा की चट्टान"। यह विश्व के सबसे ऊंचे शिव मंदिर 'तुंगनाथ' (तृतीय केदार) के ठीक ऊपर स्थित एक राजसी शिखर है।
चंद्रशिला शिखर का इतिहास सनातन धर्म की दो महान कथाओं से जुड़ा हुआ है:
चंद्रदेव को मिला था श्राप से छुटकारा: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, प्रजापति दक्ष के श्राप से मुक्ति पाने के लिए चंद्रमा (चंद्रदेव) ने इसी स्थान पर आकर भगवान शिव की घोर तपस्या की थी। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर महादेव ने उन्हें दर्शन दिए और श्राप से मुक्त किया। इसी कारण इस चोटी का नाम 'चंद्रशिला' पड़ा।
भगवान श्रीराम की साधना: एक अन्य बेहद प्रचलित मान्यता के अनुसार, लंकापति रावण का वध करने के बाद, ब्रह्म हत्या के दोष से मुक्ति और आत्म-शुद्धि के लिए भगवान श्रीराम ने इसी चंद्रशिला शिखर पर आकर महादेव का ध्यान और कठिन साधना की थी।
चंद्रशिला का सफर इसके गंतव्य से भी ज्यादा खूबसूरत है:
चोपता (भारत का मिनी स्विट्जरलैंड): इस ट्रेक की शुरुआत खूबसूरत हिल स्टेशन चोपता से होती है। वसंत ऋतु में यह पूरा रास्ता लाल-गुलाबी बुरांश (Rhododendron) के फूलों से ढक जाता है।
तुंगनाथ मंदिर (Tungnath Temple): चोपता से 3.5 किमी का पक्का चढ़ाई वाला रास्ता आपको 'तुंगनाथ मंदिर' ले जाता है, जो पंच केदारों में तीसरा और दुनिया का सबसे ऊंचाई पर स्थित शिव मंदिर है।
अंतिम 1.5 किमी का रोमांच: तुंगनाथ मंदिर से चंद्रशिला शिखर तक की अंतिम 1.5 किमी की चढ़ाई काफी खड़ी और पथरीली है, जो ट्रेकर्स के एड्रेनालाईन (Adrenaline) को बढ़ा देती है।
जब आप चंद्रशिला के शीर्ष पर पहुँचते हैं, तो वहाँ स्थित एक छोटा सा गंगा देवी मंदिर आपका स्वागत करता है। यहाँ से गढ़वाल हिमालय की विशाल पर्वत श्रृंखलाओं का जो 360-डिग्री नजारा दिखता है, वह शब्दों से परे है। यहाँ से साक्षात सामने नंदा देवी, त्रिशूल, केदारनाथ, चौखंबा, नीलकंठ, कामेट और द्रोणागिरी जैसी महान और बर्फ से ढकी चोटियां बेहद करीब नजर आती हैं।
ट्रेक की दूरी: चोपता से तुंगनाथ होते हुए चंद्रशिला तक कुल दूरी लगभग 5 किमी (एक तरफ) है।
निकटतम हवाई अड्डा: जौली ग्रांट एयरपोर्ट, देहरादून (चोपता से लगभग 220 किमी)।
निकटतम रेलवे स्टेशन: ऋषिकेश या हरिद्वार रेलवे स्टेशन। (ऋषिकेश से चोपता के लिए सीधी बसें और टैक्सियाँ उपलब्ध हैं)।
सर्वोत्तम समय:
अप्रैल से जून: हरे-भरे बुग्याल और खिले हुए फूल देखने के लिए।
अक्टूबर से नवंबर: स्पष्ट आसमान और विशाल बर्फबारी वाली चोटियों को साफ देखने के लिए।
दिसंबर से मार्च (विंटर ट्रेक): यदि आपको भारी बर्फबारी के बीच ट्रेकिंग का रोमांच पसंद है, तो सर्दियों में चोपता बर्फ की चादर में लिपट जाता है।